मोबाइल को हैकिंग और बॉटनेट मालवेयर से बचाने के लिए सावधानी जरूरी

अजमेर पुलिस अधीक्षक ने ई इस्केन सीईआरटी-इन बोट रिमूवल एप इस्तेमाल करने की दी सलाह

अजमेर, 3 सितम्बर। साइबर अपराधियों द्वारा फिशिंग लिंक के जरिए मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों में बॉटनेट मालवेयर संक्रमित कर निजी एवं बैंकिंग जानकारी चोरी करने के मामलों को देखते हुए अजमेर पुलिस ने आमजन को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस अधीक्षक श्री हर्ष वर्धन अगरवाला ने साइबर सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी करते हुए भारत सरकार द्वारा विकसित ई इस्केन सीईआरटी-इन बोट रिमूवल एप का उपयोग करने की अपील की है।

पुलिस अधीक्षक के अनुसार साइबर ठग फिशिंग लिंक भेजकर मोबाइल अथवा अन्य डिवाइस में खतरनाक मालवेयर इंस्टॉल करा सकते हैं। इसके बाद संक्रमित डिवाइस के जरिए निजी जानकारी, यूजरनेम-पासवर्ड और नेट बैंकिंग से संबंधित संवेदनशील विवरण चोरी किए जाने का खतरा रहता है।

खतरनाक मालवेयर की पहचान में मददगार ऎप

भारत सरकार के भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए ई इस्केन सीईआरटी-इन बोट रिमूवल एप विकसित किया गया है। यह ऎप मोबाइल में मौजूद बॉट, मालवेयर, ट्रोजन सहित अन्य साइबर खतरों की पहचान करने और उन्हें हटाने में मदद करता है।

ऎप मोबाइल में छिपे वायरस, स्पाइवेयर, एडवेयर और बॉटनेट संक्रमण की जांच करने के साथ-साथ एप्लीकेशन को दी गई संवेदनशील अनुमतियों पर भी नजर रखने में मदद करता है। इंटरनेट आधारित सुरक्षा व्यवस्था के माध्यम से नए साइबर खतरों की पहचान की जा सकती है और संदिग्ध एप्लीकेशन को हटाने या अलग रखने की सुविधा भी उपलब्ध है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

वॉटसएप में टू-स्टेप वेरिफिकेशन हमेशा सक्रिय रखें।

मोबाइल ऎप केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से ही डाउनलोड करें।

अज्ञात वेबसाइटों अथवा संदिग्ध स्रोतों से एपीके फाइल डाउनलोड कर इंस्टॉल न करें।

किसी ऎप को इंस्टॉल करते समय केवल आवश्यक अनुमतियां ही दें।

विश्वसनीय एंटीवायरस एवं सुरक्षा ऎप का इस्तेमाल करें।

मोबाइल के ऑपरेटिंग सिस्टम और ऎप्स को समय-समय पर अपडेट करते रहें।

बैंक खातों और डिजिटल भुगतान से जुड़े संदेशों एवं लेन-देन पर नियमित नजर रखें।

साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर दें सूचना

अजमेर पुलिस ने अपील की है कि साइबर ठगी का प्रयास होने या साइबर अपराध की घटना घटित होने पर बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। इसके अलावा नजदीकी पुलिस थाने अथवा साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना देने की अपील की गई है।

पुलिस अधीक्षक हर्ष वर्धन अगरवाला ने आमजन से अपील की है कि साइबर सुरक्षा में थोड़ी सी सावधानी डिजिटल ठगी से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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