रेसिपी मेकिंग, स्लोगन एवं मीम राइटिंग, न्यूट्रिशन क्विज और पोस्टर गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ पोषण के प्रति जागरूकता का संदेश
जयपुर, 11 सितंबर 2026: राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 2026 के अवसर पर फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर द्वारा व्यावहारिक पोषण, माइंडफुल ईटिंग और दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक इंटरैक्टिव जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल में अस्पताल के स्टाफ एवं प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य पोषण से जुड़े संदेशों को केवल चिकित्सकीय सलाह तक सीमित न रखते हुए उन्हें दैनिक जीवन में आसानी से अपनाने योग्य और व्यावहारिक बनाना था।
कार्यक्रम के दौरान रेसिपी मेकिंग प्रतियोगिता में 21 प्रतिभागियों, पोस्टर मेकिंग गतिविधि में 14 प्रतिभागियों तथा न्यूट्रिशन क्विज में 15 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने पौष्टिक एवं संतुलित आहार से संबंधित अपनी रचनात्मकता और ज्ञान का प्रदर्शन किया। रेसिपी गतिविधि के तहत प्रतिभागियों ने घर पर तैयार किए गए हेल्दी फिंगर फूड और गिल्ट-फ्री डेजर्ट प्रस्तुत किए। वहीं, पोस्टर एवं स्लोगन/मीम गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ भोजन, पोषण संबंधी जागरूकता और बेहतर खान-पान की आदतों को रचनात्मक तरीके से प्रदर्शित किया गया। न्यूट्रिशन क्विज के माध्यम से प्रतिभागियों के पोषण संबंधी ज्ञान को रोचक एवं संवादात्मक तरीके से बढ़ाया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिबंधित डाइट और अल्पकालिक फूड ट्रेंड्स के बजाय ऐसी आदतों पर जोर दिया गया, जिन्हें लंबे समय तक आसानी से अपनाया जा सके। इनमें नियमित समय पर भोजन करना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, भोजन की सही मात्रा का ध्यान रखना और फूड लेबल को सही तरीके से पढ़ना शामिल रहा। प्रतिभागियों को यह समझने के लिए प्रोत्साहित किया गया कि पोषण कोई अस्थायी प्रयास नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ रहने की निरंतर प्रक्रिया है।
कार्यक्रम में विशेष रूप से माइंडफुल ईटिंग पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को वास्तविक भूख और पेट भरने के संकेतों को पहचानने, अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर निर्भरता कम करने और अपने दैनिक भोजन में विभिन्न प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि खान-पान की आदतों में छोटे लेकिन निरंतर बदलाव अचानक और बहुत बड़े डाइट परिवर्तन की तुलना में लंबे समय तक अधिक प्रभावी और टिकाऊ रहते हैं।
कार्यक्रम में जीवन के विभिन्न चरणों के अनुसार पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर भी चर्चा की गई। उम्र, जीवनशैली और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पोषण संबंधी जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन संतुलित एवं विविधतापूर्ण आहार के मूल सिद्धांत जीवन के हर चरण में महत्वपूर्ण रहते हैं।
इस पहल के दौरान पोषण को व्यापक जीवनशैली से भी जोड़ा गया। भोजन संबंधी विकल्पों के साथ-साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन की भूमिका पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि पोषण को स्वास्थ्य से अलग किसी एक विषय के रूप में देखने के बजाय इसे समग्र स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए।
इस अवसर पर डॉ. रिचा मित्तल, हेड, डायटेटिक्स एवं नुट्रिशन विभाग, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने कहा, “पोषण निवारक स्वास्थ्य देखभाल का अभिन्न हिस्सा है और हम रोजाना जो भोजन संबंधी विकल्प चुनते हैं, उनका हमारे दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। स्वस्थ आहार का अर्थ किसी प्रतिबंधात्मक डाइट या अस्थायी ट्रेंड का पालन करना नहीं है, बल्कि भोजन में संतुलन, विविधता और निरंतरता बनाए रखना है। इस तरह की जागरूकता पहल लोगों को अपनी पोषण संबंधी जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने और अपने दैनिक जीवन के अनुरूप व्यावहारिक बदलाव करने में मदद कर सकती हैं।”
वर्कशॉप आधारित गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को पोषण से जुड़े विषयों को सरल और सहज तरीके से समझने तथा उनमें सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर मिला। आयोजकों के अनुसार, इस तरह का इंटरैक्टिव दृष्टिकोण केवल एकतरफा व्याख्यान की तुलना में आहार और जीवनशैली से जुड़े संदेशों को वास्तविक व्यवहार में बदलने में अधिक प्रभावी हो सकता है।
कार्यक्रम का समापन संतुलित पोषण, माइंडफुल ईटिंग और स्वस्थ जीवनशैली की आदतों को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने के संदेश के साथ हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य किसी एक अवसर या कभी-कभार किए गए प्रयास का परिणाम नहीं होता, बल्कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे स्वस्थ विकल्पों से धीरे-धीरे निर्मित होता है।
डॉ. मनीष अग्रवाल, फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने कहा, “पोषण निवारक स्वास्थ्य देखभाल की आधारशिला है। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर में हमारा फोकस केवल चिकित्सकीय उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सक्रिय और जागरूक निर्णय लेने के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करना भी है। स्थायी स्वास्थ्य किसी प्रतिबंधात्मक या अल्पकालिक फैड डाइट से नहीं, बल्कि नियमित भोजन का समय, भोजन की सही मात्रा का ध्यान रखना और विविध एवं प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने जैसी टिकाऊ आदतों से बनता है। आज लोगों को अपने भोजन के बारे में सही और जागरूक विकल्प चुनने में सक्षम बनाकर हम उन्हें भविष्य में जीवनशैली से जुड़ी दीर्घकालिक बीमारियों से बचाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने में मदद कर सकते हैं।”