क्या दरगाह में मिला था कांग्रेस को हाथ?

हालांकि वर्तमान में इस तथ्य के पुख्ता प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, अथवा पुश्टि करना कठिन है, मगर दरगाह से जुडे लोगों में यह किस्सा प्रचलित है कि कांग्रेस को चुनाव चिन्ह हाथ का आइडिया अजमेर स्थित दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिष्ती में मिला था। प्रसंग इस प्रकार बताया जाता है। कोई 43 साल पहले भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीया श्रीमती इंदिरा गांधी दरगाह जियारत को आई थीं। उनके खादिम थे यूसुफ महाराज व इलियास महाराज। उन दिनों पार्टी का चुनाव बदलना जाना था। दरगाह जियारत कर गुंबद षरीफ से बाहर आने पर इंदिरा जी ने बताया कि उन्हें मजार षरीफ में हाथ का पंजा दिखाई दिया। इस पर खादिम यूसुफ महाराज ने कहा कि आप इसे कांग्रेस का चुनाव चिन्ह बना सकती हैं। उन्होंने सहमति जता दी। बाद में इसी चुनाव चिह्न पर कांग्रेस जीती। इंदिरा जी फिर जियारत को आईं तो उन्होंने चांदी का एक पंजा दरगाह षरीफ में भेंट किया। प्रसंगवष बता दें कि उनके ही भाई यूनुस महाराज को इंदिरा जी ने मसूदा से टिकट दिया था। वे जीते भी। कदाचित ऐसा भी हो सकता है कि हाथ को चुनाव चिन्ह बनाने की प्रेरणा उन्हें कहीं और से भी मिली हो, और दरगाह में भी ख्याल आ गया हो। कुछ लोगों का मानना है कि हाथ चिन्ह दरगाह षरीफ में मिलने का प्रसंग प्रोजेक्टेड भी हो सकता है। जानकारी के अनुसार इंदिरा जी जियारत के बाद मुख्य द्वार पर दुपट्टा बिछा कर माथा टेकती थीं। वे कई बार दरगाह आईं। एक बार वे संजय गांधी को पुत्र-रत्न (वरुण) होने पर संजय, मेनका व वरुण के साथ आईं और इतनी ध्यान मग्न हो गईं कि चांदी का जलता हुआ दीपक हाथ में लिए हुए काफी देर तक आस्ताना शरीफ में खड़ी रहीं। वह दीपक उन्होंने यहीं नजर कर दिया।

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!