पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद इग्नू से हासिल की ज्योतिष की डिग्री; पराशरी सिद्धांत और लाल किताब के आधार पर देते हैं परामर्श
*जयपुर* । जीवन में कई बार कोई घटना केवल एक अनुभव बनकर नहीं रह जाती, बल्कि वह व्यक्ति के मन में ऐसे सवाल पैदा करती है, जिनके जवाब तलाशने की कोशिश उसकी आगे की दिशा तय कर देती है। प्रयाग भास्कर के जीवन में भी मानवीय रिश्तों में विश्वास और धोखे से जुड़ी एक घटना ने ऐसी ही जिज्ञासा पैदा की। इसी जिज्ञासा से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे ज्योतिष के अध्ययन और फिर ज्योतिष एवं वास्तु परामर्श के क्षेत्र तक पहुंचा। राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले से पैतृक संबंध रखने वाले प्रयाग भास्कर वर्तमान में जयपुर में रहकर परामर्श कार्य कर रहे हैं। उनका काम पारंपरिक ज्योतिषीय पद्धतियों के अध्ययन और उनसे जुड़े विषयों पर लोगों को परामर्श देने पर केंद्रित है।
प्रयाग भास्कर की कहानी की शुरुआत किसी तय पेशेवर योजना से नहीं, बल्कि एक ऐसे सवाल से हुई, जिसने उन्हें मानवीय व्यवहार और रिश्तों की जटिलताओं के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया। बाद में इसी सवाल के जवाब तलाशने की कोशिश ने उन्हें ज्योतिष की ओर आकर्षित किया। हालांकि, इस रुचि को अपने कार्यक्षेत्र में बदलने से पहले उन्होंने शिक्षा हासिल की, विषय का अध्ययन किया और धीरे-धीरे परामर्श कार्य की शुरुआत की।
*रिश्तों में विश्वास और धोखे से जुड़ी घटना बनी शुरुआती प्रेरणा*
प्रयाग भास्कर के अनुसार, एक संभ्रांत कॉलोनी में रहने वाली महिला के साथ जमीन से जुड़े मामले में उसके पति द्वारा धोखा किए जाने की जानकारी सामने आई थी। महिला और उसके पति से बातचीत के दौरान उनके मन में यह सवाल उठा कि करीबी रिश्तों में विश्वास क्यों टूटता है और किन परिस्थितियों में रिश्तों के भीतर अविश्वास पैदा होता है।
यह घटना उनके लिए केवल एक व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं रही। इससे जुड़े सवाल उनके मन में बने रहे और वे इनके जवाब तलाशने के लिए विभिन्न विचारों और मान्यताओं को समझने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक मान्यताओं से जुड़े विषयों के प्रति उनकी रुचि बढ़ी।
इस सिलसिले में उज्जैन के पंडित विजय जोशी से उनकी मुलाकात हुई। अपनी जन्म कुंडली को लेकर उनसे हुई चर्चा ने ज्योतिष के प्रति उनकी जिज्ञासा को एक नई दिशा दी। इसके बाद उन्होंने ज्योतिष को केवल सामान्य रुचि के तौर पर देखने के बजाय उसका व्यवस्थित अध्ययन करने का निर्णय लिया।
किसी एक घटना से पैदा हुई जिज्ञासा का अध्ययन और पेशेवर गतिविधियों तक पहुंचना उनके सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। शुरुआती सवाल रिश्तों से जुड़ा था, लेकिन उसके जवाब की तलाश ने उन्हें एक ऐसे विषय की ओर बढ़ाया, जिसमें वे आगे चलकर नियमित रूप से काम करने लगे।
*पत्रकारिता की शिक्षा के बाद ज्योतिष का औपचारिक अध्ययन*
ज्योतिष को अपने कार्यक्षेत्र के रूप में विकसित करने से पहले प्रयाग भास्कर ने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक समाचार पत्र में कनिष्ठ स्तर पर काम भी किया। इस दौरान उनका शैक्षणिक और व्यावसायिक अनुभव पत्रकारिता से जुड़ा रहा, लेकिन ज्योतिष के प्रति बढ़ती रुचि ने उन्हें इस विषय की औपचारिक शिक्षा लेने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से ज्योतिष विषय में डिग्री हासिल की। इस तरह उनकी रुचि को औपचारिक अध्ययन से जोड़ने की कोशिश हुई। इसके बाद उन्होंने ज्योतिषीय परामर्श देना शुरू किया और धीरे-धीरे इसे अपने पेशेवर कार्यक्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाया।
प्रयाग भास्कर के सफर में शिक्षा का यह पड़ाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने ज्योतिष में रुचि विकसित होने के बाद इस विषय को समझने के लिए अध्ययन का रास्ता चुना। पत्रकारिता की पढ़ाई और समाचार पत्र में काम करने के अनुभव के बाद ज्योतिष की शिक्षा हासिल करना उनके पेशेवर सफर में एक नया बदलाव था।
उनकी वर्तमान गतिविधियां ज्योतिष और वास्तु परामर्श से जुड़ी हैं। वे पारंपरिक पद्धतियों के अध्ययन के आधार पर लोगों के सवालों पर काम करते हैं और अपनी सेवाओं को विस्तार देने की दिशा में प्रयासरत हैं।
*पराशरी सिद्धांत और लाल किताब के आधार पर तैयार करते हैं फलादेश*
प्रयाग भास्कर बताते हैं कि वे पराशरी सिद्धांत और लाल किताब की पद्धतियों के आधार पर ज्योतिषीय परामर्श देते हैं। उनके काम में जन्म कुंडली का निर्माण और अध्ययन प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा, विवाह के लिए कुंडली मिलान, करियर और कारोबार से संबंधित सवालों पर भी वे परामर्श देते हैं।
जन्म कुंडली के अध्ययन और विवाह के लिए कुंडली मिलान जैसे विषय पारंपरिक ज्योतिषीय परामर्श का हिस्सा हैं। इसी तरह, करियर और कारोबार से जुड़े सवालों के साथ भी लोग ज्योतिषीय परामर्श लेने पहुंचते हैं। प्रयाग भास्कर के कार्यक्षेत्र में इन विषयों के अलावा नाड़ी दोष से संबंधित अनुष्ठान भी शामिल हैं।
उनके अनुसार, पराशरी सिद्धांत और लाल किताब की पद्धतियों का अध्ययन उनके परामर्श कार्य का आधार है। वे इन पद्धतियों के अनुरूप फलादेश तैयार करते हैं। उनके काम में अलग-अलग प्रकार के सवालों और लोगों की अपेक्षाओं को समझना भी शामिल है, क्योंकि परामर्श के लिए आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जरूरत एक जैसी नहीं होती।
कुछ लोग विवाह और पारिवारिक जीवन से जुड़े सवालों पर चर्चा करना चाहते हैं, जबकि कुछ करियर या कारोबार के संबंध में परामर्श लेते हैं। इस तरह उनका कार्यक्षेत्र व्यक्तिगत जीवन से जुड़े विषयों के साथ पेशेवर और व्यावसायिक पहलुओं तक फैला हुआ है।
*ज्योतिष के साथ वास्तु परामर्श में भी बनाई कार्यशैली*
ज्योतिष के अलावा प्रयाग भास्कर वास्तु परामर्श के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनकी सेवाओं में आवासीय भवनों, भूखंडों, संपत्तियों और व्यावसायिक परिसरों से जुड़े विषय शामिल हैं। इस प्रकार उनका काम केवल जन्म कुंडली के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भवन और संपत्ति से संबंधित वास्तु परामर्श भी शामिल है।
आवासीय भवन या भूखंड से संबंधित परामर्श लेने वाले लोगों की जरूरतें व्यावसायिक परिसरों से जुड़े सवालों से अलग हो सकती हैं। इसी तरह, संपत्ति से संबंधित मामलों में भी लोगों की अपेक्षाएं अलग-अलग होती हैं। प्रयाग भास्कर इन विषयों पर वास्तु परामर्श देते हैं और अपनी सेवाओं के माध्यम से ज्योतिष तथा वास्तु से संबंधित अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करते हैं।
ज्योतिष और वास्तु दोनों ही भारतीय परंपराओं से जुड़े विषय हैं, जिनमें विभिन्न मान्यताओं और पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। इन क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए संबंधित विषय का अध्ययन करने के साथ परामर्श लेने वाले व्यक्ति की बात समझना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रयाग भास्कर की सेवाओं में भी लोगों के व्यक्तिगत और व्यावसायिक सवालों के अनुरूप परामर्श देना शामिल है।
*कम उम्र में पहचान बनाना रहा चुनौतीपूर्ण*
किसी भी पेशे में शुरुआत के दौरान व्यक्ति को अपनी कार्यशैली और अनुभव के आधार पर लोगों का विश्वास हासिल करना पड़ता है। प्रयाग भास्कर के लिए भी शुरुआती दौर में यह एक चुनौती रही। उनके अनुसार, कम उम्र के कारण कुछ लोग शुरुआत में उनसे परामर्श लेने को लेकर संकोच करते थे।
हालांकि, उनका कहना है कि बातचीत के दौरान जब उन्हें अपने अध्ययन और काम करने के तरीके के बारे में विस्तार से बताने का अवसर मिलता था, तो लोगों के साथ संवाद स्थापित करने में मदद मिलती थी। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।
उनके अनुभव के अनुसार, परामर्श के क्षेत्र में लोगों की बात सुनना और उनके सवालों को समझना महत्वपूर्ण है। विवाह, करियर, कारोबार और संपत्ति जैसे विषयों से जुड़े सवाल कई बार लोगों की व्यक्तिगत अपेक्षाओं से भी जुड़े होते हैं। ऐसे में संवाद के माध्यम से उनकी जरूरतों को समझना कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
प्रयाग भास्कर के लिए अपने काम की शुरुआत घर से करना भी इस सफर का एक अहम पड़ाव रहा। सीमित स्तर से शुरू किए गए परामर्श कार्य को आगे बढ़ाना और अधिक लोगों तक पहुंचना उनकी भविष्य की योजनाओं में शामिल है।
*घर से शुरू किया परामर्श कार्य*
वर्तमान में प्रयाग भास्कर जयपुर में रहकर ज्योतिष और वास्तु परामर्श का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपने घर से ही परामर्श सेवाओं की शुरुआत की। उनका लक्ष्य भविष्य में अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करना और अधिक लोगों तक पहुंच बनाना है।
सवाई माधोपुर से पैतृक जुड़ाव, पत्रकारिता में शिक्षा, समाचार पत्र में शुरुआती काम और फिर ज्योतिष का औपचारिक अध्ययन—उनके सफर में कई अलग-अलग पड़ाव रहे हैं। ज्योतिष के प्रति उनकी रुचि किसी पूर्व निर्धारित पेशेवर योजना के तहत शुरू नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत एक ऐसे सवाल से हुई, जिसने उन्हें एक नए विषय का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
आगे चलकर उन्होंने इस रुचि को शिक्षा से जोड़ा और फिर परामर्श कार्य शुरू किया। आज उनका काम जन्म कुंडली के अध्ययन, विवाह के लिए कुंडली मिलान, करियर और कारोबार से जुड़े सवालों तथा वास्तु परामर्श जैसे विषयों तक फैला हुआ है।
प्रयाग भास्कर की आगे की योजना अपनी सेवाओं का विस्तार करने और जयपुर में अधिक लोगों तक पहुंचने की है। उनके सफर की खास बात यह है कि एक व्यक्तिगत जिज्ञासा से शुरू हुई उनकी खोज धीरे-धीरे अध्ययन और पेशेवर प्रयासों तक पहुंची। फिलहाल वे ज्योतिष और वास्तु परामर्श को अपने कार्यक्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।
ज्योतिष और वास्तु पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित विषय हैं। इनसे जुड़े परामर्श को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित निष्कर्ष या भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।