पाकिस्तानी सेना के पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा कारगिल युद्ध से पहले भारतीय सीमा में प्रवेश की पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने तारीफ है। उन्होंने कहा कि यह एक सैन्य कमांडर के दुस्साहस को दर्शाता है।
सिंह 2010 से 2012 तक भारतीय सेना के प्रमुख थे। उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष की ओर से भी कुछ गलतियां रही होंगी जिसकी वजह से पाकिस्तानी सेना भारतीय सीमा में प्रवेश कर पाई और मुशर्रफ सुरक्षित वापस लौट गए। संवाददाताओं से बातचीत के दौरान सिंह ने कहा, ‘मुशर्रफ के भारतीय सीमा में प्रवेश को मैं दो तरह से देखता हूं। पहला, बतौर सैन्य कमांडर मैं जनरल मुशर्रफ की तारीफ करुंगा कि वह अपनी सेना के साथ रहने के लिए भारतीय सीमा में 11 किमी तक अंदर आए।
यह सैन्य कमांडर का दुस्साहस था कि यह जानने के बावजूद वहां खतरा है वह इतनी दूर आए। दूसरा, हमारी ओर से भी कुछ गलतियां हुई। सवाल यह उठता है कि हमने उन्हें जाने कैसे दिया? हमने उन्हें सीमा के भीतर प्रवेश कैसे करने दिया? मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि वहां कुछ गलतियां हुई थी जिन्हें सुधारा जाना चाहिए।
उन्होंने यह टिप्पणी पाकिस्तानी सेना के कर्नल [सेवानिवृत्त] अशफाक हुसैन के उस रहस्योद्घाटन पर की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि 1999 में कारगिल युद्ध से तीन महीने पहले मुशर्रफ ने अपनी सेना के साथ एक रात भारतीय सीमा में गुजारी थी। सिंह ने कहा कि यह रहस्योद्घाटन इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा, ‘भारतीय सेना समेत हम सभी जानते हैं कि पाकिस्तानी सेना ने कारगिल युद्ध की शुरुआत की। इसमें नया कुछ भी नहीं है।’
पाकिस्तान की हकीकत सामने आई पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान अब तक झूठ बोलता आया है कि कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना की कोई भूमिका नहीं थी। अब उसके अधिकारी ही हमारी बात की पुष्टि कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि पाकिस्तान को युद्ध से पीछे हटना पड़ा क्योंकि इसके लिए उन्होंने राजनीतिक समर्थन नहीं लिया था।
सिंह ने कहा, ‘युद्ध सिर्फ सेना द्वारा ही नहीं लड़ा जाता। इस निर्णय के लिए राजनीतिक समर्थन की भी जरूरत होती है। अगर राजनीतिक समर्थन नहीं मिलता है तो उन्हें पीछे हटना पड़ता है।’
पाकिस्तान में मुशर्रफ की फजीहत
नई दिल्ली [जागरण न्यूज नेटवर्क]। पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ अपने ही देश में शर्मिदगी का कारण बन गए हैं। उनके अपने लोग, खासकर सेना के पूर्व अधिकारी कारगिल में घुसपैठ पर उनके झूठ का पर्दाफाश करने में लगे हुए हैं। इसके चलते पाकिस्तान में कारगिल मामले की जांच के साथ-साथ मुशर्रफ को दंडित करने की मांग तेज होती जा रही है। आइएसआइ के पूर्व महानिदेशक और रिटायर्ड जनरल जियाउद्दीन बंट्ट ने तो मुशर्रफ के फरेब का भंडाफोड़ करने वाले हालिया खुलासों को एक तरह का आरोप पत्र करार देते हुए कहा है कि अगर इस मामले की सही तरह जांच हो जाए तो उन्हें फांसी तक की सजा हो सकती है।
अपने खिलाफ हो रहे तमाम खुलासों के बावजूद लंदन में निर्वासन काट रहे मुशर्रफ पाकिस्तानी टीवी चैनलों से बातचीत में पहले की तरह डींग हांकने में लगे हुए हैं, लेकिन उनका झूठ छिप नहीं रहा है। खुद को सही साबित करने के फेर में वह जाने-अनजाने कुछ ऐसे खुलासे कर दे रहे हैं जो पाकिस्तान की भी पोल खोल रहे हैं। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल से बातचीत में मुशर्रफ यहां तक कह गए कि सभी को पता है कि 90 के दशक में हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा से हमारे कैसे रिश्ते थे? इसका खुलासा नहीं किया जा सकता और इसीलिए मैं किसी भी तरह की जांच की जरूरत से इन्कार करता हूं।
टीवी चैनल की ओर से जब मुशर्रफ से पूछा गया कि क्या उन्होंने कारगिल अभियान की इजाजत सरकार और विशेष रूप से तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से ली थी तो उन्होंने कहा कि हर चीज की इजाजत जरूरी नहीं होती। इस पर जब उनसे पूछा गया कि इसका मतलब है कि आपने किसी से इजाजत नहीं ली तो उन्होंने कहा कि अब मैं क्या कहूं? मैं आपका सवाल समझ नहीं पा रहा हूं। इन दिनों पाकिस्तान के टीवी और अखबारों में मुशर्रफ की ही चर्चा है, लेकिन ज्यादातर लोग उन्हें कोस रहे हैं।
तमाम फजीहत के बावजूद मुशर्रफ न तो कारगिल अभियान को सफल बताने से बाज आ रहे हैं और न ही डींगें हांकने से। उन्होंने कहा कि अब मुझे याद नहीं कि हमारे कितने जवान मारे गए थे। शायद 250-260 या 270 रहे होंगे, लेकिन भारत के तो 1500-1600 जवान मारे गए थे। मुशर्रफ के इस झूठ को भी अश्फाक हुसैन ने बेनकाब किया है। उनके मुताबिक करीब 1000 पाकिस्तानी जवान कारगिल में मारे गए थे। हुसैन ने यह भी कहा है कि मैंने उस समय हर किसी से यहां तक कि कारगिल में घुसपैठ का प्लान बनाने वाली चौकड़ी में शामिल रहे तब के ब्रिगेड कमांडर मसूद आलम से भी यही सवाल पूछा था कि इसका मकसद क्या है और इससे हासिल क्या होगा, लेकिन कोई भी जवाब नहीं दे पाए। अशफाक हुसैन के अनुसार, मुशर्रफ ने हेलीकॉप्टर के जरिये कारगिल में 11 किमी घुसकर जब एक रात बिताई थी तो यही जनरल मसूद आलम उनके साथ थे।
पर्दाफाश की होड़
-हाल में सबसे पहले आइएसआइ के रिटायर्ड अफसर शाहिद अजीज ने कारगिल में मुशर्रफ के फरेब का पर्दाफाश एक अखबार में विस्तृत लेख लिखकर किया।
-एक अन्य सैन्य अधिकारी अशफाक हुसैन ने विटनेस टू ब्लंडर नामक किताब में मुशर्रफ के फरेब का कच्चा-चिट्ठा खोला
– पाकिस्तानी सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर जावेद हुसैन ने भी शाहिद अजीज और अश्फाक हुसैन के दावों की तस्दीक की, साथ ही कुछ नए तथ्य भी सामने रखे
– पाकिस्तानी नौसेना के एक रिटायर्ड एडमिरल ने मुशर्रफ के कारगिल अभियान की पुष्टि की, लेकिन उन्होंने इसे उनकी बहादुरी करार दिया।
