अजमेर । उत्तर विधायक प्रो. वासुदेव देवनानी ने राज्य सरकार पर प्रदेष की तकनीकी षिक्षा का बंटाधार किये जाने का आरोप लगाया है। पूर्व तकनीकी षिक्षा राज्य मंत्री देवनानी ने विधान सभा में प्रदेश में संचालित इंजीनियरिंग कॉलेज, पालीटेक्निक कॉलेज, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के सम्बंध में एक तारांकित प्रश्न पूछा था जिसका आज सरकार द्वारा जवाब दिया गया है। देवनानी द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में सरकार ने प्रदेश के 133 इंजीनियरिंग कॉलेज, 179 पालिटेक्निक कॉलेज व 856 आईटीआई के सम्बंध में जो जानकारीयां दी है उससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने तकनीकी शिक्षा के सम्बंध में बिल्कुल भी गंभीरता नहीं बरती है।
देवनानी ने बताया कि सरकार ने उनके प्रश्न के जवाब में गत तीन वर्ष में खुले उपर्युक्त तकनीकी शिक्षण संस्थानों के निरीक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत किये है जिनके अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि अधिकाशं निजी शिक्षण संस्थानों के पास स्ंवय की भूमि अथवा भवन नहीं है। किराये के भवनों में संचालित हो रहे संस्थानों के पास भी अपर्याप्त भवन है जिनमें से कई ऐसे स्थानों पर स्थित है कि या तो भवन के निचे मार्केट स्थित है या फिर आस-पास मेें मार्केट स्थित है जो कि शैक्षणिक वातावरण के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके अतिरिक्त कई शिक्षण संस्थानों में प्रयोगशालाऐं, वर्कशॉप, कम्प्यूटर लैब व अन्य आवश्यक उपकरण नहीं है। अधिकाषं शिक्षण संस्थानों में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मापदण्डानुसार स्टाफ कार्यरत नहीं है। देवनानी ने कहा कि यह अत्यन्त विचारणीय है कि सरकार द्वारा कराये गये निरीक्षण में ऐसी कमियां उजागर होने के बाद भी इन षिक्षण संस्थानों के विरूद्ध ना तो सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी है और ना ही इनके विरूद्ध कार्यवाही की जाने हेतु अखिल भारतीय तकनीकी षिक्षा परिषद को अनुशंशा की गयी है।
देवनानी ने बताया कि वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 में इंजीनियरिंग कॉलेजों व पालिटेक्निक कॉलेजों में प्रवेश की अन्तिम तिथि को कई बार आगे बढ़ाया गया जिससे निजी संस्थानों को लाभ पहुंचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि निजी संस्थानों को लाभ पहुचांने के लिए तो सरकार द्वारा सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर प्रवेश की अन्तिम तिथि घोषित होने के बाद भी कई निजी पालीटेक्निक कॉलेजों के निरीक्षण कर उन्हें प्रवेष प्रक्रिया में सम्मिलित कर लिया गया ।
देवनानी ने बताया कि सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेजो में प्रवेश के लिए 2010-11 में अंतिम तिथि 1.10.10 रखी जबकि परीक्षा आरम्भ तिथि 03.02.11 तथा वर्ष 2011-12 में प्रवेष हेतु अंतिम तिथि 15.09.11 व परीक्षा तिथि 28.01.12 तथा वर्ष 2012-13 में प्रवेष तिथि 10.10.12 व परीक्षा तिथि 31.01.13 रखी गयी। इसी प्रकार पालीटेक्निक कॉलेजों में 2010-11 में प्रवेष तिथि 29.01.11 व परीक्षा तिथि 30.05.11 एवं वर्ष 2011-12 प्रवेष तिथि 31.12.11 व परीक्षा तिथि 28.05.12 तथा 2012-13 में प्रवेष तिथि 30.11.12 व परीक्षा तिथि 22.04.13 रखी गयी। इस प्रकार प्रवेष की अन्तिम तिथि व परीक्षा आरम्भ तिथि में जो अन्तराल रहा है उससे विद्यार्थियों का न्यूनतम कार्यदिवस अध्यापन हो सका है इसमें भी सन्देह उत्पन्न होता है।
देवनानी ने कहा कि आज प्रदेष में तकनीकी षिक्षण संस्थानों का जो हाल सामने आया है, उससे यह प्रष्न स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है कि ऐसे संस्थानों में अध्ययन करके हमारे विद्यार्थी कैसी दक्षता हासिल कर पाऐंगे तथा प्रतिस्पर्धा के आज के युग में अपना स्थान व पहचान कैसे बना पाऐंगे।
जवाब की प्रति संलग्न
2. प्रदेष में विकलांग बच्चों के षिक्षण की नहीं है उचित व्यवस्था – देवनानी द्वारा पूछे गये प्रष्न के जवाब में सामने आई सच्चाई
अजमेर । उत्तर विधायक प्रो. वासुदेव देवनानी ने आज विधान सभा में अतारांकित प्रष्न के माध्यम से राज्य सरकार से प्रदेष में विकलांग बच्चों के षिक्षण तथा उनके लिए विषेष षिक्षकांे की व्यवस्था के सम्बंध में जानकारी मांगी थी। इस सम्बंध में सरकार द्वारा प्राप्त जवाब से यह स्पष्ट होता है कि प्रदेष में विकलांग बच्चों के षिक्षण की उचित व्यवस्थाओं का अभाव है।
देवनानी ने बताया कि सरकार ने उनके प्रष्न के जवाब में यह बताया है कि विकलांग बच्चों के षिक्षण हेतु भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा पंजीकृत मात्र 272 विषेष षिक्षक प्रदेष में प्रारम्भिक षिक्षा के अन्तर्गत कार्यरत है जबकि माध्यमिक षिक्षा के अन्तर्गत तो प्रदेष में मात्र 10 विषेष षिक्षक पंजीकृत है जोकि केवल जयपुर जिले से है।
देवनानी द्वारा राज्य में विकलांग बच्चों की संख्या व श्रेणी के अनुसार विद्यालयों मं विषेष षिक्षकों की नियुक्ति के सम्बंध में चाही गयी जानकारी में सरकार ने सर्व षिक्षा अभियान के अन्तर्गत विकलांग बच्चों के षिक्षण हेेतु सामान्य षिक्षकों को तकनीकी एवं शैक्षणिक संबलन प्रदान करके ब्लाक स्तर पर एचआईवीआई एवं एमआर श्रेणी के एक-एक विषेष षिक्षक लगाये जाने का प्रावधान किया जाना बताया है तथा पंचायतीराज विभाग द्वारा 2012-13 में नियुक्त किये गये तृतीय श्रेणी अध्यापकों में 637 पदों पर विषेष षिक्षकों को लगाया जाना बताया है लेकिन कब तक यह स्पष्ट नहीं किया है।इसी प्रकार माध्यमिक षिक्षा में 485 विषेष षिक्षकों के द्वितीय श्रेणी के पद स्वीकृत बताये गये है जिनकी भर्ती प्रक्रिया हेतु राजस्थान षिक्षा सेवाा नियम 1971 में अपेक्षित संषोधन संबंधी प्रस्ताव प्रक्रियाधीन बताया गया है।