आंध्रप्रदेश की टीमों ने चलाई स्वयं सहायता समूहों के गठन की नई हवा

jaipur 8-4-2013जयपुर। राज्य में गरीबी उन्मूलन के लिए चलाई जा रही राजस्थान ग्रामीण आजीविका परियोजना की मुहिम के तहत आंध्रप्रदेष से आए कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन एवं प्रोफेषनल रिसोर्स पर्सन ने पिछले एक महीने में 5 जिलों के 48 गांवों में 252 स्वयं सहायता समूहों का गठन, 202 समूह बुककीपर्स का चयन व प्रषिक्षण एवं 80 महिला एक्टीविस्ट को चयनित किया है। आंध्रप्रदेष के इन सीआरपी एवं पीआरपी ने इन समूहों के गठन में आई चुनौतियों को सोमवार को यहां इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में आयोजित कार्यषाला में साझा किया। यह कार्यषाला राज्य के पांच जिलों में पहले चरण में कार्य करने वाले सीआरपी एवं पीआरपी के अनुभवों, चुनौतियों एवं आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद की ओर से आयोजित की गई। इस कार्यषाला में ग्रामीण विकास विभाग के एसीएस सी एस राजन, ग्रामीण विकास सचिव अभय कुमार व राजस्थान ग्रामीण आजीविका मिषन के राज्य निदेषक पी सी किषन एवं परियोजना निदेषक डॉ राकेष मल्हो़त्रा सहित कई अधिकारी मौजूद थे।
कर्यषाला में आंध्रप्रदेष के सीआरपी एवं पीआरपी ने टोंक व झालावाड जिले के अपने अनुभव बताते हुए कहा कि ग्रामीणों में स्वयं सहायता समूहों के गठन को लेकर सरकारी कर्मचारियों एवं एनजीओ के प्रति विष्वास नहीं है क्योंकि ये लोग पहले कई बार उनसे पैसा लेकर भाग गए। इन स्थितियों में ग्रामीणों में फिर से विष्वास कायम करना चुनौतीपूर्ण काम रहा। इसकेे अलावा राजस्थान के गांवों में पर्दा प्रथा, भाषा की समस्या, षौचालय, अषिक्षा, बालविवाह व सामाजिक कुरीतियां तथा गरीबी आदि की समस्या भी आडे आई। आंध्रप्रदेष के सीआरपी व पीआरपी ने ग्रामीणों को अपने आत्मनिर्भर होने और अपने परिवार को षिक्षित व आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उदाहरण पेष किए। इनकी प्रेरणा से पांचों जिलों टोंक, झालावाड, कोटा, बारां व चूरू के ग्रामीणों में आत्मविष्वास पैदा हुआ है।
आंध्रप्रदेष की तर्ज पर चलाई जा रही इस अनूठी परियोजना के तहत सीआरपी व पीआरपी ने पांचों जिलों में सक्रिय महिला कार्यकर्ता भी तैयार की हैं जिनका सहयोग आंध्रप्रदेष के लोगों के जाने के बाद इस परियोजना के लिए अन्य जिलों में लिया जाएगा। इस परियोजना के तहत गरीब महिलाओं को संगठित एवं जागरूक कर स्वयं सहायता समूह बनाने, प्रषिक्षित कर समूहों की क्षमता विकसित करने तथा बैंक में खाता खोलने व ऋण दिलाने में सहायता करने, ग्राम तथा क्षेत्रीय स्तर पर संगठन बनाकर गरीबी उन्मूलन, आय में बढोतरी तथा स्वावलंबी बनाने का काम किया जाएगा।
कार्यषाला में एसीएस सीएस राजन ने कहा कि आंध्रप्रदेष के सीआरपी एवं पीआरपी ने राजस्थान की महिलाओं में आत्मविष्वास पैदा करने की जो पहल की है, इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे। इससे सामाजिक कुरीतियां दूर करने में भी मदद मिलेगी।
ग्रामीण विकास सचिव अभय कुमार ने कहा कि आंध्रप्रदेष के लोगों ने राजस्थान में स्वयं सहायता समूहों के गठन के मुष्किल काम में सराहनीय पहल की है। उन्होंने फील्ड में आने वाली परेषानियों का समय समय पर फीडबैक देने का आग्रह किया। राजस्थान ग्रामीण आजीविका मिषन के राज्य निदेषक पीसी किषन ने बताया कि 5 साल की इस परियोजना के तहत 40 लाख परिवारों को गरीबी के दायरे से बाहर निकालकर आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने का लक्ष्य है। मिषन के परियोजना निदेषक डॉ राकेष मल्होत्रा ने कार्यषाला के प्रारंभ में परियोजना की विस्तार से जानकारी दी।

कल्याणसिंह कोठारी

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