बड़े रिटर्न का चक्रव्यूह, रहें सावधान

be-careful-with-these-schemesबीते हफ्ते बाजार नियामक संस्था सेबी से जुड़ी तीन बड़ी खबरें आईं जो आपकी निवेश की दुनिया से सीधे ताल्लुक रखती हैं। पहली घटना कुछ यूं है। दिल्ली में एक जनाब को किसी गुमनाम व्यक्ति का फोन आता है। वह अपने आपको एक म्युचुअल फंड का एजेंट बताता है। एजेंट को अच्छी तरह से मालूम है कि वह जिस व्यक्ति से बात कर रहा है, उसके बेटे की मृत्यु हो चुकी है। एजेंट उस पिता को बताता है कि उसके बेटे ने किसी खास फंड में निवेश किया है और निवेश की राशि परिवक्व होकर पांच लाख हो गई है। उसके बाद एजेंट बताता है कि अगर उस योजना में 2.5 लाख रुपये और लगाए जाएं तो मैच्योरिटी की कुल रकम बढ़कर 12.5 लाख रुपये हो जाएगी।

ये तथ्य बाजार नियामक संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास पहुंचते हैं और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारियों के साथ मिलकर जब मामले की जांच की जाती है, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। जिस टेलीफोन से एजेंट ने फोन किया था, वह किसी और नाम से पंजीकृत है। कंपनी का नाम भी जाली है। दबिश के बाद खुलासा हुआ कि संगठित तरीके से कई निवेशकों को धोखा देने की कोशिश की गई थी। फोन पर लोगों को यह जानकारी दी जाती थी कि मैच्योरिटी अमाउंट पाने के लिए निवेशकों को किसी नई म्युचुअल फंड योजना अथवा किसी बीमा योजना में निवेश करना जरूरी है अन्यथा मैच्योरिटी का बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में कट जाएगा। दिल्ली पुलिस और बाजार नियामक सेबी इस कहानी में कुछ और खुलासे करने वाले हैं। लेकिन अब तक कि कहानी से कुछ बातें बिल्कुल स्पष्ट हैं निवेशकों को ऐसे किसी भी गारंटी के चक्कर में नही पड़ना चाहिए जो रातों रात आपके पैसे को दोगुना या चौगुना करने का दावा करते हैं।

कई मामलों में कुछ शुरुआती निवेशकों पर अपना विश्वास जमाने के बाद ऐसी कई कंपनियां रातों रात गायब हो चुकी हैं और उनका पता लगाना सरकारी एजेंसियों के लिए भी टेढ़ी खीर ही साबित हुआ है। सेबी ने निवेशकों को आगाह किया है कि एजेंट और कंपनी का कर्मचारी बनकर योजनाएं बेचने वालों की पूरी जांच पड़ताल के बाद ही निवेश का कोई फैसला करें।

 

ऐसी ही एक और कहानी

सेबी ने कोलकाता स्थित सुमंगल इंडस्ट्रीज लिमिटेड को फर्जी तरीके से निवेशकों से रकम जुटाने के आरोप में कार्रवाई करते हुए कंपनी को अपना कारोबार समेटने का सख्त निर्देश दिया है। अपने निर्देश में सेबी ने कंपनी को निवेशकों से रकम न जुटाने सहित अपनी परिसंपत्तियों की किसी तरह की खरीद बिक्री नहीं करने और निवेशकों से जुटाई गई रकम को किसी दूसरी स्कीम में ट्रांसफर न करने की आदेश जारी किया है।

इस कंपनी ने 11 सितंबर, 2012 को कोलकाता के एक स्थानीय अखबार में विज्ञापन दिया था। इसमें एक स्कीम का हवाला देते हुए ‘आलू’ में निवेश करके भारी मुनाफा कमाने की पेशकश की गई थी। ‘फ्लेक्सी पोटेटो परचेज स्कीम’ के तहत कंपनी ने लोगों को 20 से सौ फीसद मुनाफे का भरोसा दिया था। अपनी स्कीम में कंपनी ने कहा था कि वह निवेशकों से ली गई रकम को आलू खरीदने में लगाएगी और इस आलू को वह कोल्ड स्टोरेज में रखेगी। बाजार में आपूर्ति कम होने के समय वह इसे मुनाफे पर बाजार में बेचेगी। कंपनी ने पंद्रह महीने में निवेशकों को मुनाफा दिलाने की बात विज्ञापन में कही थी। कंपनी द्वारा एक लाख रुपये का ‘पोटेटो बांड’ भी निवेशकों को देने की बात कही गई थी।

अपने आदेश में सेबी ने कहा है कि कोई भी कंपनी ‘कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम’ (सामूहिक निवेश योजना) तब तक नहीं चला सकती है, जब तक कि उसे नियामक से इस तरह के योजना चलाने की अनुमति न मिले। बाजार नियामक ने कंपनी से इस स्कीम से जुड़े दस्तावेज, निवेशकों की जानकारी सहित और कई महत्वपूर्ण जानकारी देने को कहा है। इससे पहले कंपनी ने दावा किया था कि वह इस स्कीम के तहत आलू का व्यवसाय कर रही है और उसे इसकी मान्यता मिली हुई है। नियामक ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सेबी अधिनियम, 1992 की धारा 11 ए ए के तहत कंपनी की यह योजना कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम के दायरे में आती है। इस आदेश में कानून की धारा 12 (1 बी) का भी जिक्र है, जिसके तहत ऐसी योजनाओं को शुरू करने के लिए सेबी की मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य है।

सेबी के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला ‘सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान’ का है। अपने आदेश में सेबी ने निवेशकों की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता बताते हुए कंपनी को उसके इस प्लान को तत्काल बंद करने को कहा है।

तीसरी घटना के तहत सेबी ने धामपुर स्पेशिलिटी शुगर लिमिटेड पर निवेशकों के लिए जरूरी शिकायत निवारण व्यवस्था स्कोर के दिशानिर्देश का पालन न करने के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।

आपके लिए बड़ा सबक

इन घटनाओं का लब्बोलुआब यही है कि जब भी कोई आपसे पैसे को बिना आधार के कई गुना करने या तयशुदा रिटर्न देने की पेशकश अथवा वादा करता है तो यह दावा गैरकानूनी है। एक स्मार्ट निवेशक के तौर पर आपको यह समझ में आ चुका होगा कि नागरिकों से किसी भी तरह की जमा लेने के लिए आरबीआइ की अनुमति लेनी जरूरी है। अगर कोई आपसे लिए गए पैसे को निवेश योजना में लगाना चाहता है तो उसे इसके लिए सेबी की अनुमति लेना आवश्यक है।

निवेश मंत्र

-भ्रामक विज्ञापनों से सावधान रहें

-तयशुदा रिटर्न की गारंटी के फेर में न पड़ें

-जांच लें कि कंपनी की स्कीम को सरकार या रेगुलेटर की अनुमति है अथवा नहीं

-भरोसेमंद वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें

-सेबी के टोलफ्री नंबर इन्वेस्टर हेल्पलाइन की मदद लें

-टोल फ्री नंबर 1800 266 7575 अथवा 1800227575 पर मदद मांगें

-किसी भी परेशानी की स्थिति में डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटस्कोर्सडॉटजीओवीडॉटइन पर शिकायत दर्ज कराएं। इस बेवसाइट पर उन शिकायत के घेरे वाली कंपनियों की लिस्ट है।

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