अजमेर। शहर जिला कांग्रेस के पूर्व महासचिव नरेश राघानी मधुकर ने मुख्यमंत्री से सिंधी समाज को अपेक्षित तवज्जो देने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने गहलोत को एक पत्र लिखा है, वहां यहां हूबहू दिया जा रहा है।
आदरणीय मुख्यमंत्री जी,

मैं इस पत्र के माध्यम से आपको पार्टी हित में कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं की ओर आपका ध्यान आर्कषण चाहता हूं। अजमेर शहर में पार्टी को गत विधानसभा चुनावों में शहर की दोेनो विधानसभा सिटो पर विजय प्राप्त नही हुई है। इस का कारण अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के सिन्धी मतदाताओं का परिसिमन पश्चात् अजमेर उत्तर व दक्षिण दोनो विधानसभा क्षेत्र में बट जाना व जातिवाद भरा माहौल था जो गत विधानसभा चुनाव के दौरान इस शहर मंे बन गया था। मुख्यतौर से इसका संबध सिन्धी समाज से था जिसके मतो की संख्या दोनो विधानसभा क्षेत्रो में कुल मिलाकर लगभग 75 हजार थी। (अजमेर उत्तर में 34 हजार व अजमेर दक्षिण में 41 हजार )
अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र शुरू से ही सिन्धी बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से पार्टी सदैंव सिन्धी समाज को विधानसभा चुनाव में मौका देती आई है और पार्टी का यह फारमूला सदा कामयाब रहा हैं। स्वं श्री किशन मोटवानी के बाद अजमेर का सिन्धी मतदाता पार्टी की पकड़ से बाहर हो गया है जिसके कई कारण है।
1. स्वं नानकराम जगतराय के बाद पार्टी के भीतर किसी भी सिन्धी नेता को संगठनात्मक तौर पर इतनी तवजो नही मिली कि वो व्यक्ति अपने आप को विधायक के रूप में पार्टी आलाकमान के सामने प्रस्तुत कर सके। जिसके कारण वर्ष 2003 में श्री नरेन शाहनी भगत को नये चेहरे के रूप में चुनाव लड़ने का मौका दिया गया। पार्टी के लिए बिल्कुल नया चेहरा होते हुए भी बहुत कम मतो से हार गये। इतने कम मतो के अन्तर से उनका चुनाव हारना अपने आप में यह साबित करता है कि यह क्षेत्र पूर्णतया सिन्धी बाहुल्य था।
2. 2008 में परिसिमन के पश्चात् सिन्धी मतो का बटवारा उत्तर व दक्षिण में हो गया परन्तु फिर भी दोनो विधानसभा क्षेत्रो में इनकी संख्या अच्छी मात्रा में थी। लगभग 34 हजार उत्तर व 41 हजार दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में।
यही कारण था जब पार्टी ने स्वं श्री किशन मोटवानी के बाद पहली बार एक गैर सिन्धी प्रत्याक्षी डॉ श्री गौपाल बाहेती को इस सीट से विधानसभा टिकट दिया। स्वच्छ छवि के व्यक्ति होने के बावजूद भी वह इस जातिवाद के चलते चुनाव हार गये, क्यांेकि भाजपा ने उस वक्त यह माहौल भाप लिया था व डॉ श्री गौपाल बाहेती के सामने प्रोफेसर वासुदेव देवनानी को पुनः अजमेर उत्तर से पार्टी टिकट दिया जिसका संदेश अजमेर दक्षिण के लगभग 40 हजार सिन्धी मतदाताओं में गया व कांग्रेस के दोनो प्रत्याक्षी विजयी नही हो सकें।
3. यह सब बाते स्पष्ट करती है कि सिन्धी समाज की भूमिका अजमेर शहर के दोनो विधानसभा क्षेत्रो को प्रभावित करती है। जिसका ख्याल रखना पार्टी की आगामी विधानसभा चुनाव में दोनो सीटों पर जीत दर्ज कराने की नजर से बहुत आवश्यक है।
4. आज भी कांग्रेस संगठन के भीतर सिन्धी समाज की उपेक्षा होती दिखाई दे रही है। जिला कांग्रेस कमेटी में कोई भी सिन्धी समाज से किसी भी जिम्मेदार पद पर बतौर पदाधिकारी शामिल नही किया गया है, ना ही अजमेर से किसी को प्रदेश में बतौर सिन्धी नेता कोई जिम्मेदारी दी गई है श्री नरेन शाहनी भगत एकमात्र कदावर सिन्धी नेता के रूप में देखे जाते थे। जिन्होने गत कुछ दिनों पहले एसीडी की कार्यवाही के चलते इस्तीफा दे दिया है। जिसके पश्चात् अजमेर विकास प्राधीकरण के अध्यक्ष पद हेतु भी लोगो ने दौड़ लगाना प्रारम्भ कर दिया है।
ऐसे माहौल में यह आवश्यक हो गया है कि पार्टी पुनः पुराने व कामयाब फॉरमूले पर विचार करे व शहर के सिन्धी मतदाताओं की भावना का ध्यान रखते हुए सिन्धी समाज से किसी को पार्टी की और से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे ताकि सिन्धी समाज कांग्रेस द्वारा उपेक्षित महसूस न करे। यदि पार्टी ऐसा कदम उठाती है तो इसका संदेश निश्चित ही दोनो विधानसभा क्षेत्रों के सिन्धी मतदाताओं में जायेगा व पार्टी निश्चित तौर पर दोनो विधानसभा क्षेत्रों से विजयी होगी।
किसी भी ऐसी स्थिति में चार महत्वपूर्ण विकल्प है जिनके माध्यम से पार्टी सिन्धी समाज को संतुष्ट कर सकती है
1 विधानसभा टिकट
2. कांग्रेस अध्यक्ष पद
3. अजमेर विकास प्राधीकरण का अध्यक्ष
4. राजस्थान सिन्धी साहित्य एकेडमी का अध्यक्ष पद
समझने योग्य यह बात है कि इन चारो विकल्पो मे से किसी एक से सिन्धी समाज को संतुष्ट किया जा सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष पद पर पहले से ही श्री महेन्द्र सिंह रलावता विराजमान है ओर बहुत अच्छा काम कर रहे है। राजस्थान सिन्धी साहित्य एकेडमी का अध्यक्ष यदि अजमेर से बनाया जाता तो भी बड़ी आसानी से यह संतुलन अजमेर शहर में बिठ्ाया जा सकता था। परन्तु राजस्थान सिन्धी साहित्य एकेडमी का अध्यक्ष भी नियुक्त किया जा चुका है जो कि जयपुर से है।
अतः पार्टी यदि बाकी बचे दो विकल्पो में से एक के माध्यम से सिन्धी समाज को संतुष्ट करती है तो आने वाले विधानसभा चुनाव में शहर के दोनो विधानसभा क्षेत्रों उत्तर व दक्षिण से कांग्रेस की जीत निश्चित की जा सकती है।
सिन्धी कौम के हितो के सरक्षण को ध्यान में रखते हुए गत कुछ वर्षो पहले मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा प्रदेश स्तर पर सिन्धी कल्याण परिषद का गठन कर स्वं श्री नन्दलाल सचदेव को उसका अध्यक्ष मनोनित किया गया था। इसी तर्ज पर राजस्थान में भी ऐसा किया जा सकता है सिर्फ इतना ही नही इसका सकारात्मक संदेश पूरे राजस्थान में बसे सिन्धी मतदाताओं तक जायेगा जो कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी हित में रहेगा।
मैं पार्टी कार्यकर्ता होने की हैसियत से पार्टी हित की बात आप तक निस्वार्थ भावना से पंहुचा रहा हूँ और बड़े आत्मविश्वास से मेरा यह मानना है कि यदि कांग्रेस संगठन इन सब बातो को ध्यान मंे रखते हुए आगामी निर्णय करेगी तो निश्चित तौर से जीत दर्ज कराएगी।
सदभावी
नरेश राघानी ‘मधुकर