भ्रष्टाचार मिट सकता है, मगर…

rajendra singh hira thumbभ्रष्टाचार जन्म के समय “नॉर्मल” की जगह सिजेरियन डिलीवरी _अस्पताल व डॉक्टर का भ्रष्टाचार । दूध मे मिलावट व मिलावटी दूध का भ्रष्टाचार । अनाज ,फल व सब्जियों मे कीटनाशक का भ्रष्टाचार । ज़हरीली हवा का स्वांस मे भ्रष्टाचार । शिक्षा मे “डोनेशन “का भ्रष्टाचार । नौकरियों मे सिफारिश का भ्रष्टाचार । बीमारी मे नकली दवाओं का भ्रष्टाचार । विकलांगों की बैसाखियों के साथ भ्रष्टाचार । देवताओं की देवभूमि पर भ्रष्टाचार । गरीब ,निरीह व भोली भाली जनता के साथ भ्रष्टाचार । यहीं तक नहीं देश की रक्षा सुरक्षा मे भी भ्रष्टाचार । उठते बैठते ,सोते जागते ,जीवन से मरण तक भ्रष्टाचार । यह भ्रष्टाचार कई सौ सालों तक नहीं मिटेगा । हाँ भ्रष्टाचार मिट सकता है जल्द बहुत जल्द । शर्त पर इतनी भर है की :हर भारतीय अपने मे भारतीयता की भावना सँजोये एक जुट हो कर इसके खिलाफ हो जाए -सचे मन से । बस यही एक रास्ता है । जयहिंद (अजमेरनामा के गिरधर तेजवानी से कल फोन पर बात के बाद यह लेख लिखने की प्रेरणा मिली । लेख उन्हीं को समर्पित ।
-राजेन्द्र सिंह हीरा

1 thought on “भ्रष्टाचार मिट सकता है, मगर…”

  1. और राजनैतिक दलों के नेताओं का भ्रष्टाचार … और वे लोग जिन्होंने भ्रष्टाचार को देश में पाला, पोसा और प्रोत्साहित किया और उस दलदल में आम नागरिक फँस कर रह गया …

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