राजस्थान केंद्रीय विश्वविधालय को 134 लाख का अनुदान

रसायन विभाग को 72 लाख का अनुदान, गणित विभाग को 62 लाख का अनुदान
curajअजमेर / बांदरसिंदरी (कलसी)। विज्ञान और प्रौधोगिकी के बुनियादी ढांचे में सुधार हेतु राजस्थान केंद्रीय विश्वविधालय के दो विभाग रसायन व गणित विभाग को अगले पांच वर्ष तक विभाग में स्नातकोत्तर शिक्षण और अनुसंधान सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौधोगिकी विभाग द्वारा फण्ड फार इम्प्रूवमेंट आफ साइंस एण्ड टेक्नोलाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर (फिस्ट) के तहत 72 लाख व 62 लाख रूपये का प्राथमिक अनुदान स्वीकार किया गया है।
स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा की गुणवत्ता व अनुसंधान के मूल्य को ध्यान में रखते हुए विश्वविधालय में हुए अनुसंधान का त्रिस्तरीय (थ्री-टायर) असर होता है। विश्वविधालयों व अन्य उच्च शिक्षण सस्थाओं में विज्ञान व प्रौधोगिकी के बुनियादी ढांचे में सुधार हेतु भारत सरकार द्वारा वर्ष 2000 में एक महत्वपूर्ण अनुदान (फिस्ट) की शुरूआत की गर्इ ताकि विज्ञान व प्रौधोगिकी के बुनियादी ढांचे का देश में बेहतर ढंग से पुनिनिर्माण किया जा सके।
जनसम्पर्क अधिकारी श्रीमती अनुराधा मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान केंद्रीय विश्वविधालय नव स्थापित केंद्रीय विश्वविधालयों के बीच पहला ऐसा विश्वविधालय है जिसके रसायन व गणित विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर गहन जांच और प्रस्तुति के बाद डीएसटी द्वारा महत्वपूर्ण अनुदान दिया जा रहा है। इस अनुदान का उपयोग दोनों विभागों में अत्याधुनिक कम्प्यूटर लैब, लाइब्रेरी व अन्य रिसर्च सुविधाओं को जुटाने हेतु किया जायेगा।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविधालय के कुलपति व स्कूल अ‚फ़ मैथमेटिक्स, स्टेटिसिटक्स व कम्प्यूटेशनल साइंसेज के डीन प्रो. ए.पी. सिंह ने बताया कि रसायन व गणित विश्वविधालय के प्रथम विभाग हैं जिन्हें इस तरह का अनुदान की मंजूरी प्राप्त हुर्इ है। प्रो. सिंह ने कहा कि विश्वविधालय की स्थापना के प्रथम पांच वर्षों में यह अनुदान मिलना एक उपलबिध है। प्रो. सिंह ने यह भी विश्वास दिलाया कि आने वाले वर्षों में विश्वविधालय के अन्य विभागों हेतु विज्ञान और प्रौधोगिकी विभाग में अनुदान हेतु आवेदन किया जाएगा।
स्कूल अ‚फ़ केमिकल साइंसेज एंड फार्मेसी के डीन प्रो. आर.टी. पारदासानी ने कहा कि इस अनुदान से कर्इ उपकरण जैसे सी.एच.एन. एनलाइज़र, यू.वी. विजि़बल स्पैक्ट्रोफोटोमीटर व अन्य अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जा सकेंगे। मुझे विश्वास है कि यह नए उपकरण विश्वविधालय में पहले से ही मौजूदा उपकरणों के मूल्य को बढ़ाएंगे और अनुसंधान को गति प्रदान करेंगे।
कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि विश्वविधालय को इस बात का विश्वास है कि इस तरह के महत्वपूर्ण अनुदान से न सिर्फ विश्वविधालय के विभिन्न विभागों को फायदा होगा बलिक राजस्थान की अन्य सार्वजनिक और निजी वित्त पोषित संस्थानों, विश्वविधालयों व विभिन्न औधोगिक अनुसंधान एवं विकास इकार्इयों को भी इसका लाभ मिलेगा।
सुमित कलसी
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