विश्व हिंदू परिषद अजयमेरू महानगर द्वारा विश्व हिंदू परिषद के स्वर्ण जयंती वर्ष के अंतरगर्त चल रही संगीतमय राम कथा के चैथे दिन कथा वाचक राष्ट्रीय संत परम पूज्ज दिव्य मुरारी बापू ने आज अपने श्रीमुख से सती एवं र्पावती जन्म का वर्णन करते हुए शिव विवाह का बड़ा सुंदर चित्रण किया। सर्वप्रथम भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया। भगवान शंकर विश्वास के स्वरूप है, माता पार्वती श्रृद्वा स्वरूप है। आघ्यात्मिक दृष्टी से श्रद्धा और विश्वास का मिलन यही शिव विवाह का मूल है। साघक के जीवन में अपने घर्म कर्म के प्रती श्रद्धा और अपने साध्ान के प्रति विश्वास होना चाहिये।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रचार प्रमुख शरद गोयल ने बताया की पूजा अर्चना के पश्चात संत श्री के श्रीमुख से कल के आगे की कथा आरंभ हुई। सती जी ने अपने पति अथार्त जगत पति भगवान शंकर से जब कपाट किया यानी उनसे झूठ बोला जब भगवान राम एवं लखन माता सीता को वन मे खोज रहे थे तथा साधारण पुरुष की भाँति विलाप कर रहे थे।
हे खग हे मृग हे मधुकर श्रेणी तुम देखी सीता मृग नयनि । अथार्थ लीला कर रहे थे तब सती भगवान शिव के समझा ने पर भी राम जी को साधारण पुरुष समझ कर संशय कर रही थी एवं भगवान की परीक्षा ले डाली और शिव जी पूछने पर झूठ बोला।
काहु न परीक्षा लीन्ह गोसाई ,कीन्ह प्रमाण तुम्हारी नाई। और तव शंकर देखा धर ध्याना ,चरित जो कीन्ह सती सब जाना।
भगवान शंकर ने संकल्प ले लिया शिव संकल्प कीन्ह मन माही , यत तन सती भेद मोहि नाही यानी शिव जी संकल्प ले लिया की हमारी पत्नी होते हुए भी हमसे झूठ बोला हमारी बात नही मानी तो इसको साथ रखना उचित नही है अतः स्पष्ट रूप से कहा जाए तो किसी के साथ कपट पूर्वक व्यवहार कर उसको दुखी करने से आप स्ववं दुखी होते हो तब सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ मे जाकर योगाग्नि मे शरीर को भस्म कर दिया और हिमालय के यहा पार्वती के रूप मे जन्म लिया एवं स्वयं मे भगवान शिव के प्रति श्रद्धा भाव उत्पन्न किया अथार्थ विश्वास के प्रति श्रद्धा उत्पन्न की तत्पश्चात शिव जी ने पार्वती से विवाह किया।
शिव विवाह का वर्णन करते हुए संत श्री ने अपने मुखारबिंद से कहा की शिव पार्वती विवाह अटल एवं अटूट आस्था का केंद्र है जब शिव जी पार्वती से विवाह करने बारात लेकर पर्वतराज हिमालय के यहा पहुँचे तो वहा उपस्थित सभी अतिथि शिव जी के रूप को देख अचंभित थे, क्यो की वर रूपी शिव ने अपना वही साक्षात रूप जैसा वो सदेव रहते है शरीर पर भस्म का लेप गले मे लिपटे साँप नाग वस्त्र के रूप मे सिंह छाल रुद्राक्ष धारण किए हुए हाथ मे त्रिशूल व डमरू अथार्थ साक्षात रुद्र अवतार और सवारी नंदी महाराज की बरती के रूप मे उनके गण रीच्छ अघोरी साधु इत्यादि थे। शिव जी का रूप देख अनेक लोग भयभीत हो गये तभी भगवान विष्णु के निवेदन पर शंकर जी सोम्य रूप मे आए और विवाह संपन्न हुआ साथ मे 33 करोड़ देवी देवता स्वयं जगत पिता ब्रम्हा भगवान विष्णु इंद्र आदि देवता भी थे। ऐसी विशाल बारात संपूर्ण सृष्टि मे कभी किसी की नही देखी ।
रामायण एवं संत श्री की पूजा आज के जजमान श्री सत्यनारायण जी हेडा के द्वारा की गई। प्रशाद वितरण श्री गोविंद जी दधीच एवं श्रीमती दाखकंवर जी के द्वारा किया गया। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री आनंद अरोड़ा महानगर मंत्री शशिप्रकाश इन्दोरिया सर्वेश्वर अग्रवाल श्री सरदारमल जैन श्री अशोक मेघवाल श्री लेखराज सिंह श्रीमती अल्का गौड़ अभिलाषा शक्ति जैन अनुपम गोयल राजेश जैन सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम मे रोजाना हजारो श्रद्धालु कथा सुनने आ रहे है।
कल कथा मे राम जन्मोत्सव का वर्णन एवं राम जन्म का आयोजन किया जाएगा, यह कथा दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक विभिन्न अध्यायों के माध्यम से चलेंगी जिसमे प्रतिदिन रामायण के अलग अलग सोपानों पर संगीतमय कथा का वाचन होगा। 21 तारीख को दोपहर 1.15 बजे विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन रखा गया है। जिसमे देश भर के अनैक संत महात्मा उपस्थित रहेंगे।
प्रचार प्रमुख
शरद गोयल 9414002132