
अजमेर। संतो के आर्शीवाद से परिवारों में सनातन संस्कृति का ज्ञान बढता है, सिन्धु संस्कृति का ज्ञान भी हमें युवा पीढी को देनी है, बाबा ईसरदास जी ने अपने जीवन में सदैव सेवा, सिमरन व नाम जपने का जो मंत्र दिया और आज उन्हे याद करके हम अपने जीवन को सफल बना रहे हैं, ऐसे अमृत वचन श्री ईश्वर मनोहर उदासीन आश्रम में श्रीमहन्त हंसराम जी उदासीन ने प्रकट किये।महन्त स्वरूपदास उदासी नेे बताया कि श्री 108 महन्त बाबा ईसरदास साहिब के 90वें वार्षिक उत्सव पर राष्ट्रीय महामंत्री व बालकधाम किशनगढ के स्वामी श्यामदास, इन्दौर के स्वामी संतोखदास, स्वामी आत्मदास-उज्जैन, महन्त बाबा मोहनदास-मुम्बई खार, स्वामी ख्यिमादास- सतना, स्वामी ईश्वरदास-सतना, स्वामी मोहनदास- भोपाल, स्वामी गणेशदास- भीलवाडा, स्वामी माधवदास-इन्दौर, संत हंसदास-रीवा, संत दर्शनदास-गांधीधाम, स्वामी अमरलाल- राजकोट, स्वामी तुलसीदास कलतारी-बैरागढ, महन्त लक्षमणदास त्यागी- भीलवाडा पंचमुखी दरबार सहित अजमेर के स्वामी रामदास, श्यामदास, आत्मदास, फतनदास, दादा नारायणदास कई महापुरूषों ने आर्शीवचन प्रकट किये।
आश्रम में आज हवन यज्ञ, झण्डा साहिब, अखण्ड पाठ साहिब का भोग, संतो महंतो का समागम व आम भण्डारे का आयोजन किया गया। गुरूजनों की आरती, समाधियों साहिब पर चादर चढाना व वार्षिक उत्सव की पूर्णाहूति पल्लव के साथ की गई। सेवाधारी जोधपुर के लखू किशनाणी, गोपी ज्ञानाणी, चन्द्रलाल भोपाल, अजमेर के शंकर सबनाणी, मोहन कल्याणी, भगवानदास सबनाणी, घनश्याम आडवाणी, कन्हैया खानचंदाणी, राजू किशनाणी, दीपक बालाणी, हरीश मोदियाणी, मोहन कोटवाणी, रमेश वलीरामाणी सहि कई कार्यकर्ताओं ने सेवायें दी।