सतगुरू ऐज्यूकेषनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट को भूमी आवंटन के पारित प्रताव पर ऐतराज

20160317_173030अजमेर 17 मार्च। शहर जिला कांग्रेस ने अजमेर विकास प्राधिकरण द्वारा सतगुरू ऐज्यूकेषनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट को अजमेर में पैंतालीस हजार वर्ग भूमी आवंटन के पारित प्रताव पर ऐतराज जताते हुऐ इस आवंटन पर रोक लगाने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि धन लोलूपता के दबाव में एक सौ पचास करोड़ की जमीन रियायती दर पर देकर प्राधिकरण सरकार को करोड़ो का वित्तीय घाटा पहुंचा रहा है।
इसकी जांच के लिये गुरूवार को शहर कांग्रेस के अध्यक्ष विजय जैन की अगुवाई में एक प्रतिनिधी मंडल ने सम्भागीय आयुक्त हनुमान सहाय मिणा से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि अजमेर विकास प्राधिकरण की 9 मार्च की बैठक में सतगुरू ऐज्यूकेषनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट अजमेर को एक विद्यालय एवं होटल निर्माण के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को भेजने किये जाने का निर्णय किया है। ट्रस्ट द्वारा प्रस्तुत आवेदन भूमि आवटन योग्य नहीं है, किन्तु इसके बावजूद को अविधिक तरीके से व्यवसायिक लाभ देने के मद्देनजर प्रस्ताव सरकार को भेजा जा रहा है।
नियमों का हवाला देते हुऐ बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा भूमि आवंटन निति के अनुसार माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों हेतु अधिकतम 4000 वर्ग मीटर भूमि आवंटन का प्रावधान है। इस प्रकार स्पष्ट है कि विद्यालय हेतु 4000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि का आवंटन नहीं किया जा सकता है परंतु ट्रस्ट द्वारा बीस हजार वर्ग मीटर की मांग की गई है यह जोड़ तोड़ एवं भ्रष्टाचार को बढावा देने के मद्देनजर राज्य सरकार की भूमि आवंटन नियम 2015 के प्रावधानों की खुली अवहेलना है। ज्ञापन में ट्रस्ट को अयोग्य बताते हुऐ बताया कि ट्रस्ट द्वारा विस्तृत डी.पी.आर. प्रस्तुत नहीं किये जाने के बावजूद अजमेर विकास प्राधिकरण ने स्थानीय स्तर से प्रस्ताव का अनुमोदन करने का निर्णय लिया है वह प्रथम दृष्टया ही गलत है।
ज्ञापन में इस मामले मे भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुऐ बताया गया कि इसी ट्रस्ट ने प्राधिकरण से एक पाॅच सितारा होटल निर्माण हेतु पच्चीस हजार वर्ग मीटर भूमि की मांग की है जिसे बिना प्रतिस्पर्दी प्रतियोगिता के ही राज्य सरकार को स्वीकृति हेतु भिजवाना वित्तीय नियमों की अवहेलना है। राजस्थान सरकार के भूमि आवंटन नियम 2015 के अनुसार होटल निर्माण हेतु प्रतिस्पर्दी बोली के माध्यम से भूमि आवंटन का स्पष्ट प्रावधान है। प्रतिस्पर्दी बोली की सफलता हेतु भूमि आवंटन नियम 2015 में यह सुपरिभाषित किया गया है कि होटल हेतु भूमि आवंटन से पूर्व राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर खुले विज्ञापन प्रसारित किये जाये तत्पष्चात् प्राप्त बोली दाताओं में सर्वाधिक उच्च बोली दाता को ही भूमि प्रदान कि जाये। किन्तु अजमेर विकास प्राधिकरण द्वारा सतगुरू ऐज्यूकेषनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट को प्रतियोगी बोली प्रणाली से पृथक करते हुए विधि विरूद्ध आवंटन की चेष्टा की जा रही है जो किसी बड़े भ्रष्टाचार, भूमि घोटाले के संकेत हैं।
शहर कांग्रेस ने सम्भागीय आयुक्त को बताया कि भूमि आवंटन नियम 2015 एवं होटल निर्माण नीति के अनुसार होटल निर्माण हेतु भूमि आवंटन करने के लिए पर्यटन विभाग को नोडल विभाग के रूप में घोषित किया गया है इसलिए होटल निर्माण हेतु भूमि आवंटन करने अथवा आवंटन हेतु भूमि चिन्हीत करने से पूर्व पर्यटन विभाग की सहमति आवष्यक है। नगर नियोजन विभाग अजमेर द्वारा 2023 व 2033 हेतु प्रस्तावित मास्टर प्लान में होटल एवं स्कूल के लिऐ प्रस्तावित भूमि का भू-उपयोग व्यवसायिक दर्षाया गया है जिसको बिना केवल खुली निलामी में बेचा जा सकता है। ऐसी भूमि जिसको मास्टर प्लान में व्यवसायिक उपयोग हेतु दर्षाया गया हो का आवंटन अरबन लैंड डिस्पोजल रूल्स 1974 के अन्र्तगत नहीं किया जा सकता है।
सम्भागीय आयुक्त सौंपे ज्ञापन के अनुसार कि भूमि का आवंटन 700 रूपये प्रतिवर्ग मीटर अथवा डी.एल.सी. के 50 प्रतिषत की दर से किये जाने की कार्यवाही चल रही है। जबकि उल्लेखनीय है कि भूमि आवंटन नियम 2015 के अनुसार डी.एल.सी. के 50 प्रतिषत दर से भूमि केवल तभी आवंटन कि जा सकती है जब निर्माण पर निवेषक 100 करोड का निवेष करें। सतगुरू ऐज्यूकेषनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पास 100 करोड़ की ना तो कोई वित्तीय संस्थान है और ना ही इतने बड़े योग्य वित्तीय साख है। इस भूमि का बाजार भाव वर्तमान में 150 करोड़ रूपये है जबकि अजमेर विकास प्राधिकरण द्वारा यह भूमि मात्र 3.15 करोड़ में एक व्यापारी को दिये जाने की तैयारी की जा रही है। इस प्रकार प्रकरण अन्तर्गत राज्य सरकार को 147 करोड़ रूपये की हानी होना सम्भाव्य है।
प्रतिनिधी मंडल वे सम्भागीय आयुक्त से मांग कि की सतगुरू ऐज्यूकेषनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट को स्कूल अथवा होटल निर्माण के लिए भूमि आवंटन किया जाना राजस्थान सरकार के भूमि आवंटन नियम 2015 तथा होटल नीति 2006 का पूर्णतया उल्लघंन है और सरकार को राजस्व हानी कारित करने वाला होगा। अजमेर विकास प्राधिकरण द्वारा पारित प्रस्ताव के अंग्रेषण की कार्यवाही को अविलम्ब रूकवाई जाऐ तथा प्राधिकरण की 9 मार्च की बैठक के कार्यवाही विवरण में से आवंटन हेतु पारित किये गये प्रस्ताव के समस्त अंष हटावाया जाऐ।
प्रतिनिधी मंडल में विजय जैन के अलावा विजय नागौरा, मुजफ्फर भारती, अंकुर त्यागी शामिल थे।
भवदीय
विजय जैन

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