मन के संतुलन से ही स्वस्थ जीवन का निर्माण संभव : डॉ. स्वतंत्र शर्मा

विवेकानंद केंद्र की योग पद्धति पंचमहाकोषों के समग्र जागरण पर आधारित

अजमेर। विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी द्वारा संचालित योग पद्धति केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित न होकर व्यक्ति के मन, प्राण एवं संपूर्ण व्यक्तित्व के समग्र विकास पर केंद्रित है। यह योग पद्धति महामुनि पतंजलि के अष्टांग योग एवं वशिष्ठ योग की शास्त्रीय परंपरा पर आधारित वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक साधना पद्धति है, जो “आधि से व्याधि” के सिद्धांत को केंद्र में रखकर कार्य करती है।

उक्त विचार विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, राजस्थान प्रांत के कार्य पद्धति प्रमुख डॉ. स्वतंत्र शर्मा ने टोरंटो पैलेस, भजनगंज, अजमेर में संचालित निशुल्क योग सत्र के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश रोगों की उत्पत्ति मन में उत्पन्न होने वाले तनाव, चिंता एवं मानसिक असंतुलन से होती है। जब व्यक्ति लंबे समय तक मानसिक दबाव एवं तनाव में रहता है तो यह स्थिति “आधि” के रूप में मन पर प्रभाव डालती है, जो धीरे-धीरे शरीर में “व्याधि” के रूप में प्रकट होती है।

डॉ. शर्मा ने कहा कि जहां अधिकांश योग पद्धतियां केवल रोगों के उपचार पर केंद्रित रहती हैं, वहीं विवेकानंद केंद्र की योग प्रणाली रोग के मूल कारण अर्थात मन की स्थिति पर कार्य करती है। उन्होंने पंचमहाकोषों की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि मानव शरीर अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष एवं आनंदमय कोष से निर्मित है। योगाभ्यास की विभिन्न प्रक्रियाएं इन पांचों कोषों पर क्रमशः प्रभाव डालती हैं।

उन्होंने बताया कि शिथलीकरण का प्रभाव अन्नमय कोष पर पड़ता है, सूर्य नमस्कार अन्नमय एवं प्राणमय कोष को सक्रिय करता है, आसन अन्नमय, प्राणमय एवं मनोमय कोष पर कार्य करते हैं तथा प्राणायाम का प्रभाव अन्नमय कोष से लेकर विज्ञानमय कोष तक अनुभव किया जाता है। जब इन सभी प्रक्रियाओं का समन्वित प्रभाव व्यक्ति के भीतर विकसित होता है तब आनंदमय कोष की अनुभूति होती है, जो व्यक्तित्व के उज्ज्वल एवं संतुलित स्वरूप का आधार बनती है।

डॉ. शर्मा ने कहा कि विवेकानंद केंद्र की प्रत्येक कार्यपद्धति का मूल आधार योग ही है। चाहे संस्कार वर्ग हो, स्वाध्याय वर्ग, केंद्र वर्ग, योग वर्ग अथवा विभिन्न प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएं—सभी के केंद्र में योग का ही भाव निहित है। उन्होंने महामुनि पतंजलि के सूत्र “योगश्चित्तवृत्ति निरोधः” एवं वशिष्ठ योग के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि विवेकानंद केंद्र का मूल चिंतन मन के शुद्धीकरण एवं संतुलन पर आधारित है।

योग सत्र के दौरान आज प्रतिभागियों को  शिथलीकरण , सूर्य नमस्कार, विभिन्न आसनों एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। योगाभ्यास में बड़ी संख्या में योग साधकों एवं स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

नगर प्रमुख अंकुर प्रजापति ने जानकारी देते हुए बताया कि यह निशुल्क योग शिविर आगामी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह के साथ संपन्न होगा।उन्होंने अधिकाधिक नागरिकों से योग सत्रों में सहभागिता कर स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

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