अहंकार विनाश का, पतन का कारण

केकड़ी::– इंसान अहंकार में आकर भूल कर भी किसी का दिल ना दुखाएं,सबका भला मांगे। क्षमा मांगने वाले को क्षमा करें। सबका आदर सत्कार करें तो स्वयं का भी भला होगा।अहंकार तो पतन की निशानी है,विनाश का कारण है।उक्त उद्गार अजमेर से आई ज्ञान प्रचारक बहन शांति ने अजमेर रोड स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन पर आयोजित सत्संग के दौरान व्यक्त किए।
मंडल प्रवक्ता राम चंद टहलानी के अनुसार बहन शांति ने कहा कि परमात्मा हमें कदम कदम पर क्षमा करते हैं और हम इंसान अहम में आकर क्षमा नहीं करते। हर चीज की अपनी हद होती है जैसे साथी है मित्र गंगा के जल बिंदु पान तक,अर्धांगिनी भी बढ़ेगी तो केवल मकान तक, परिवार के सब लोग चलेंगे तो शमशान तक,बेटा भी हक निभाएगा तो अग्निदान तक,इससे आगे तो भजन ही है साथी,हरि के भजन बिना अकेला रहेगा,रे मन दो दिन का मेला रहेगा,कायम न जग का झमेला रहेगा।इसलिए उठते-बैठते,चलते-फिरते प्रभु परमात्मा के नाम का सिमरन करते रहना चाहिए यही साथ जाना है बाकी सब यहीं छूट जाना है।दुनिया की हर वस्तु जो चमड़ी की आंखों से दिख रही है नाशवान है,मोह रखना है तो प्रभु परमात्मा से रखो,प्यार करना है तो प्रभु परमात्मा से करो क्योंकि परमात्मा अपने भक्तों का मान रखते हैं और हम इंसान कदम कदम पर गांठ बांध कर परमात्मा की बनाई मुरत का तिरस्कार करते जाते हैं जो कि हमें नुकसान ही देती है इसलिए इंसान को जीवन में बड़ा बन कर सबको क्षमा कर,सबका आदर सत्कार कर अपनाने की चाहत रखनी चाहिए जिससे वह औरों को भी सुख प्रदान करेगा एवं स्वयं भी सुखी रह सकेगा।
सत्संग के दौरान अंजू,रेनू,भारती,प्रीति,गौरव,निशा,नमन दीपक,गोपी,संगीता,कविता, समृद्धि,तरुणा,उमेश आदि ने गीत विचार भजन प्रस्तुत किए संचालन नरेश कारिहा ने किया।

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