युग सुंदर, सदियां सुंदर, गर मानव जीवन हो सुंदर- संत गोपाल

केकड़ी:– सद्गुरु के आदेश को हमें अक्षरसःमानना है हमें हमारे रिश्तो का घर परिवार का वातावरण सुंदर बनाना है युग सुंदर,सदियां सुंदर,गर मानव जीवन हो सुंदर उक्त उद्गार संत गोपाल ने अजमेर रोड से संत निरंकारी सत्संग भवन पर आयोजित सत्संग के दौरान व्यक्त किए।
मंडल प्रवक्ता राम चन्द टहलानी के अनुसार संत गोपाल ने कहा कि एक नूर है सबके अंदर,नर है चाहे नारी है,ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य हरिजन इक दी खलकत सारी है। सब इंसानों में हर जीव में एक ही परमात्मा का नूर है इसलिए हमें सब का सत्कार आदर सत्कार करना है अगर हम किसी का निरादर कर रहे हैं तो हम अपना ही नुकसान कर रहे होते हैं । इसलिए परमात्मा को अंग संग जानकर अंग संग मानकर सद्गुरु के आदेशों को वचनों पर हमें खरा उतरना है।जो इंसान सद्गुरु पर अपना आपा अर्पण करता है सद्गुरु परमात्मा उसकी खाली झोली स्वयं भरता है तीन लोक नौ खंड में गुरु से बड़ा ना कोई,कर्ता करे न कर सके गुरु करे सो होय परमात्मा अगर रूठ जाए तो कोई बात नहीं अगर गुरु रूठ गया तो उस इंसान का कोई ठिकाना नहीं रहता है वह जीव दर दर की ठोकर खाकर भटकता रहता है इसलिए हमें गुरु के आदेशों को भी अक्षरसः मानना है ब्रह्म की प्राप्ति धर्म की जानकारी होना बहुत जरूरी है मानव जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है घर भ्रम की प्राप्ति होती है तो भ्रम का नाश अपने आप ही हो जाता है इसलिए मानव जीवन में गुरु के आदेशों को मानकर उसे जीवन में अपना कर जीवन जीना है तभी हमारा जीवन सार्थक है।
सत्संग के दौरान गौरव,विवेक, सानिया,नमन,समृद्धि,दिव्या, शीतल,बीना,उमेश,आरती,संगीता,दीपक,अशोक रंगवानी आदि ने गीत विचार भजन प्रस्तुत किए संचालन नरेश कारिहा ने किया।

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