निम्बार्क कोट में मनाया कृष्ण-रुकमणी विवाह उत्सव
अजमेर, 27 दिसंबर। जीवात्मा रूपी बीज का रोपण करने के लिए गोपियों ने परमात्मा के हृदय में स्थान मांगा। जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही रास है। ठाकुरजी सर्वत्र हैं। इन्हें कण-कण में महसूस कीजिए। पंडित रविशंकर शास्त्री ने श्री निम्बार्क कोट मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में यह प्रवचन दिए।
कथावाचक ने विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि लौकिक संबंध प्रभु से जोड़ लो तो श्रेष्ठ बन जाओगे। गोपियों ने संसार को परमात्मा से प्रेम करना सीखाया। सच्चा प्रेम परमात्मा से ही संभव है। वर्तमान में प्रेम की जगह आसक्ति आ गई है। प्रेम सदैव बढ़ता है जबकि आसक्ति निरंतर घटती है। परमात्मा से प्रेम आनंद व सुख देता है। मनुष्य से आसक्ति विरह और विलाप की वजह बनती है। सुमित सारस्वत ने बताया कि कथा में मनीष शर्मा ने श्रीकृष्ण व वृंदा शर्मा ने रुकमणी के रूप में विवाह प्रसंग का सजीव मंचन किया। आर्य शर्मा ने कृष्ण व नेहा शर्मा ने राधा बनकर गोपियों संग रास किया। आज मेरे श्याम की शादी.., मेरे बांकेबिहारी लाल.., तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे.. जैसे मधुर भजनों पर श्रोता झूम उठे। कथा में कैलाशचंद जोशी, महेश जोशी, सीके सक्सेना, दिनेश शर्मा, फूलचंद प्रजापति, चेतन प्रकाश जोशी, द्वारकाप्रसाद दाधीच, रामरतन सहित बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। शुक्रवार को फूलों से बृज होली खेली जाएगी व कृष्ण-सुदामा प्रसंग का गुणानुवाद होगा।
सुमित सारस्वत
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