बुखार- खांसी ना रुके तो जांचें फंगल संक्रमण

इम्युनिटी की कमी से जल्दी होता है फंगल संक्रमण
अजमेर, 27 अप्रैल( )। डायबिटीज, श्वास रोग, गुर्दा रोग व लीवर रोग से पीड़ितों में रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्युनिटी) कम होने की वजह से फंगल संक्रमण (इंफेक्शन) जल्दी होता है। यह फंगल संक्रमण जानलेवा भी हो सकता है।
यह जानकारी मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अजमेर के अस्थमा, टी.बी व श्वास रोग विशेषज्ञ डाॅ प्रमोद दाधीच ने एक संगोष्ठी (सीएमई) में दी। डाॅ दाधीच ने कहा कि अगर किसी मरीज को बुखार, खांसी दवाइयां लेने के बावजूद ठीक नहीं हो रही है तो फंगल संक्रमण को जरूर जांचना चाहिए।
डाॅ दाधीच ने बताया कि विश्वभर में होने वाले संक्रमणों में सबसे घातक संक्रमण फंगल संक्रमण है। जिसमें मृत्युदर 40 प्रतिशत तक हो सकती है। यह मृत्युदर अन्य किसी भी दूसरे संक्रमण से अधिक है।
डाॅ दाधीच ने बताया कि मूलतः दो तरह के फंगल संक्रमण (इंफेक्शन) घातक होते हैं। इनमें एक केंडीडा व दूसरा एस्परजिलस है। इनमें सामान्य रूप से कंडीडा नोन एलविकन्स ज्याद घातक होते हैं। भारत में केंडीडा ट्रोपीकेलिस सबसे अधिक पाया जाता है जिसे रोकने के लिए पुरानी दवाइयां मसलन फ्लूकोनाज़ोल काम नहीं करती हंै और नई दवाइयां बहुत महंगी आती हैं। निदान के लिए कुछ जांचंे उपलब्ध हैं जो बड़े अस्पतालों व शहरों में हैं जिसके अभाव में इलाज में देरी होती है व संक्रमण बढ़ जाता है व फंगल सेप्सिस से मरीज अपने प्राण गवां बैठता है।
संगोष्ठी का संचालन मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की हैड- एडमिनीस्ट्रेशन डाॅ विद्या दायमा ने किया। संगोष्ठी में अनेक चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।
फोटो- अस्थमा, टी.बी. व श्वास रोग विशेषज्ञ डाॅ प्रमोद दाधीच संगोष्ठी को संबोधित करते हुए।

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