‘काश ऐसी दुआ करे कोई जर्द पत्ता हरा करे कोई‘

‘ये मेरी गज़ल मुझे ही रूलाए है‘
काव्य गोष्ठी में दिवंगत वरिष्ठ साहित्यकारों को दी श्रद्धांजलि

अजमेर/अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, अजमेर साहित्य मंच और अंतर्भारती कला साहित्य परिषद् द्वारा दिवंगत साहित्यकार भगवत प्रसाद प्रमोद और मोहनलाल तँवर को शब्दांजलि अर्पित करते हुए रविवार सांयकाल चारण शोध संस्थान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता करते हुए गीतकार गोपाल गर्ग ने तरन्नुम में ‘काश ऐसी दुआ करे कोई जर्द पत्ता हरा करे कोई‘ गज़ल गुनगुनाई तो पूरा सदन वाह वाह कर उठा। संयोजक द्वय कुलदीप सिंह रत्नू ने ‘जो लोग चले जाते हैं यादें छोड़ जाते हैं‘ और व्यंग्यकार प्रदीप गुप्ता ने ‘वोटर तू कर ले गल्ती से मिस्टेक‘ हास्य कविता सुनायी। संचालन कर रहे बाल साहित्यकार गोविन्द भारद्वाज ने ‘मैं भी शब्द रचता हूँ मैं भी साहित्यकार हूँ‘ के द्वारा रचनाकर्म जारी रखने की सलाह दी। डॉ ध्वनि मिश्रा ने ‘साहिल की मिट्टी होकर भी प्यासी हूँ मैं‘ गीत और डॉ विनिता जैन ने गुजरता दौर ये भी अच्छा हो या बुरा आबे हयात में साथ है तू‘ पंक्तियां सुनायी। युवा गीतकार गौरव दुबे ने ‘ये मेरी गजल मुझे ही रूलाए है‘ गीत, देवदत्त शर्मा ने ‘बोधि वृक्ष बन जाओ तुम भी‘ और डॉ हरिश गोयल ने ‘तुम बाजीगर हो शब्दों के‘ काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं। रामावतार यादव ने ‘खून के रिश्तों ने दम तोड़ दिया‘ और नवोदित रचनाकार झलक अग्रवाल ने ‘क्यूँ यहाँ रोटी के लिए भटकना पड़ता है‘ कविताओं से समाज का संवेदनशील चित्रण किया। गोष्ठी में अनिल गोयल, देशवर्द्धन रांकावत, दिलीप सिंह चारण इत्यादि भी उपस्थित रहे।
-कुलदीप सिंह रत्नू विभाग संयोजक संपर्क-9414982406

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