अजमेर 1 जुलाई -सिंध और हिंद का अलग होना अननेचुरल (नददंजनतंस) है और एक होना स्वभाविक है। सिंध हिंदुस्तानियों के दिल में है, हिंदुस्तान के राष्ट्रगान में है और सिंध बहुत जल्दी ही भारत का हिस्सा बनेगा। 23वें सिंधु दर्शन उत्सव के दौरान पवित्र सिंधु नदी के किनारे राश्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिश्ठ प्रचारक व यात्रा संयोजक मा. इन्द्रेष कुमार ने अपने विचार व्यक्त किए। सिंधु तट पर अलग-अलग प्रांतों, धर्मोंव जातियों के समूह ने माननीय इन्द्रेष जी के सन्निध्य में एकता की चेन बनाई और आवाहन किया कि, हम सब एक थे, एक हैं और एक रहेंगे व साथ ही संकल्प किया कि अब भारत की एक इंच भूमि कटने नही देंगे और एक भी देशवासी को बेमौत मरने नही देंगे।
प्रदेष प्रभारी महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने बताया कि सिन्धु दर्शन यात्रा समिति द्वारा 23 से 26 जून तक लेह में सिंधु दर्शन उत्सव आयोजित किया गया जिसमें चार दिन के सांस्कृतिक, धार्मिक तथा राश्ट्रीय एकता के कार्यक्रमों के साथ-साथ प्रकृति का अनुपम सौन्दर्य व मन को छू लेने वाले प्राकृतिक दृश्य व कुछ ऐतिहासिक स्थानों को भी देखने का मौका मिलता है। तीर्थयात्रा में देषभर से यात्रियों की संख्या 1117 रही। इनके अलावा अपनी अपनी व्यवस्थाओं से भी यात्री लेह पहुंचता है। विभिन्न मार्गो के तीर्थयात्री आज अपने अपने प्रांतों में लौट आये।
सड़क मार्ग वाले तीर्थयात्रियों का लेह के निवासियों द्वारा भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए मा. इन्द्रेष कुमार ने लद्दाख की भौगोलिक, संास्कृतिक व राजनीतिक स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हांेंने लद्दाख के समाज में जाति वर्गीकरण न होने की बात भी बताई व उन्होंने कहा कि किस तरह से इस यात्रा ने लद्दाख में अमूल परिवर्तन किए है यहां का समाज आज ज्यादा षिक्षित व संपन्नता की और बढ़ा है। चीन की विस्तारवादी नीति हमेषा से लद्दाख को घेरने की रही है जिसे लद्दाख के बहादुर सैनिकों व नागरिकों ने उचित जवाब दिया है। राश्ट्रीय सिन्धी भाशा विकास परिशद की ओर संगोश्ठी का भी आयोजन किया गया।
मुख्य कार्यक्रम सिंधु घाट पर आयोजित किया गया था। गायत्री पूजा में हवन संपन्न हुआ जिसे यहां के स्थानीय एकमात्र हिंदू मंदिर हरे कृश्णा मंदिर के पुजारी जी ने गायत्री माँ क आव्हान कर यज्ञ पूरा करवाया। बौद्व परंपारा के अनुसार भी पूजा की गई जिसे परम पूज्यनीय रिम्पोचे जी के आठवें अवतार चोकसंग पोल्गा रिम्पोचे जी ने संपन्न किया। सिंधी सनातन परंपरा के अनुसार भी पवित्र बहराणा पूजन करवाया गया सांस्कृतिक कार्यक्रम भारत सरकार के संस्कृति विभाग के उत्तर भारत सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला की ओर से प्रस्तुत किए गए जिसमें मणिपुर व त्रिपुरा के जनजातीय नृत्यों को सबने खूब सराहा। आसाम के बीहु नृत्य व लद्दाख्ी नृत्यों ने दर्षकों की खूब वाहवाही लूटी। इनके अलावा विद्याभारती द्वारा संचालित विद्यालय भारतीय विद्याा निकेतन के बच्चों ने भी लद्दाखी नृत्य प्रस्तुत किए। मा.इंद्रेश कुमार ने सिंधु दर्शन यात्रा पर अलग-अलग लोगों द्वारा लिखी गई चार पुस्तकों का लोकार्पण किया। इन पुस्तकों के माध्यम से सिंधु दर्शन यात्रा के बारे में विस्तार से जान सकते हैं।
चौथे दिवस समापन समारोह लेह स्टेडियम में सिंधु दर्षन यात्रा का समापन समारोह आयोजित किया गया। जहां षहर की एसएसपी श्रीमती षुक्ला व उनके सहयोगी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। धन्यवाद भाशण सिंधु भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष राधाकृश्ण भागिया ने दिया।
(महेन्द्र कुमार तीर्थाणी)
मो. 9414705705