पर्यावरण बचाएं, हर एक अपनों के नाम पौधे लगाएं— डॉ ज्योत्सना रंगा
अजमेर,11 अगस्त()। हृदय की धमनियों में रुकावट के उपचार में केवल ब्लॉकेज की पहचान पर्याप्त नहीं है, बल्कि धमनी के भीतर की वास्तविक स्थिति और रक्त प्रवाह पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का सटीक आकलन उपचार की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
आधुनिक इमेजिंग और फिजियोलॉजी तकनीकें चिकित्सकों को ब्लॉकेज की गंभीरता समझने, उपचार की आवश्यकता तय करने तथा स्टेंट के सटीक चयन और प्रत्यारोपण में महत्वपूर्ण मदद कर रही हैं। इससे परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (पीसीआई) को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा रहा है। यह विचार इटली के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गिउलियो गुआग्लियमी ने व्यक्त किए।
वे मंगलवार को मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अजमेर के सभागार में हृदय रोग विभाग के तत्वावधान में आयोजित विशेष व्याख्यान में ‘परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन में इमेजिंग और फिजियोलॉजी की भूमिका’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अजमेर की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ज्योत्सना रंगा ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में हर दिन नवाचार हो रहा है। आधुनिक तकनीक से ह्रदय रोगियों सटीक उपचार करने में ह्रदय रोग चिकित्सकों को महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। इस तरह के आयोजन मरीजों के हित में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षाविदों और चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच में आपस में साझा किए गए अनुभव एवं विचार निश्चित ही भविष्य में ह्रदय रोगियों पर किए जाने वाले शोध में भी सहायक होंगे। उन्होंने सफल आयोजन के लिए मित्तल हॉस्पिटल प्रबंधन की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर एक पौधा मां के नाम अभियान को आगे बढ़ते हुए उपस्थित चिकित्सकों और संभागियों को पौध वितरित कर पर्यावरण संरक्षण में भागीदार बनने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्यके को अपने जीवन में अपनों के नाम कम से कम दस पौधे लगाने चाहिए।
मित्तल हॉस्पिटल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गुप्ता ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण कम उम्र में भी हृदय रोग और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में आधुनिक डायग्नोस्टिक और इंटरवेंशनल तकनीकों का उपयोग मरीज के लिए उपचार की बेहतर रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण है।
वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेक माथुर ने कहा कि इमेजिंग और फिजियोलॉजी आधारित मूल्यांकन से उपचार के दौरान चिकित्सकों को अधिक वैज्ञानिक एवं सटीक निर्णय लेने में सहायता मिलती है। इससे स्टेंट की सही स्थिति, उपचार के परिणाम और मरीज की दीर्घकालिक स्थिति का बेहतर आकलन संभव होता है।
व्याख्यान में हृदय रोग विशेषज्ञों ने आधुनिक पीसीआई तकनीकों और उपचार की नवीनतम व्यवस्थाओं पर विशेषज्ञ चर्चा की। कार्यक्रम में अनेक चिकित्सकगण एवं तकनीकी कर्मचारी उपस्थित थे।