पालिकाध्यक्ष मित्तल की कुर्सी पर एक बार फिर मंडराए खतरे के बादल

तिलक माथुर
केकड़ी नगर पालिका अध्यक्ष अनिल मित्तल की कुर्सी पर फिर से खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, कहा जा रहा है कि उन पर एक बार फिर से निलंबन की तलवार लटकी है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने एक बार फिर से पालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल के निलंबन की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि अतिशीघ्र उन्हें विभिन्न आरोपों में दोषी मानकर निलंबित किया जा सकता है। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि इस बार उनके साथ तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी भरतलाल मीणा सहित अधीनस्थ अन्य कुछ कर्मचारियों पर भी निलंबन की गाज गिर सकती है। ध्यान रहे कि पूर्व में 31 मई 2019 को जब डीएलबी ने उन्हें निलंबित किया था तो साथ में सम्बंधित जिम्मेदार अधिशाषी अधिकारी व अधीनस्थ कर्मचारियों को निलंबित नहीं किया था जिसकी वजह से पालिकाध्यक्ष मित्तल को न्यायालय में अपने बचाव में यह कहने का मौका मिल गया कि उनके खिलाफ द्वेषतापूर्ण कार्यवाही की गई है और हाईकोर्ट ने उन्हें 7 जून को पहली ही तारीख पर स्टे दे दिया। जानकारी मिली है कि इस बार विभाग यह गलती नहीं दोहराएगा उनके साथ तत्कालीन अधिकारियों को भी आरोपी मानते हुए निलम्बित किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार इस बार उन्हें राजपुरा रोड़ पर स्थित आदिनाथ वाटिका तक नगर पालिका क्षेत्र में न होने के बावजूद सड़क निर्माण करना व निर्माण कार्य में घटिया सामग्री काम में लेने के मामले की जांच में दोषी मानते हुए तथा ढंड के रास्ते पर सड़क निर्माण में बरती गई अनियमितता सहित एक-दो अन्य मामलों में अनियमितता बरतने का आरोपी मानने के साथ ही गत दिनों एसीबी द्वारा की गई पांच मामलों की जांचो में दोषी मानते हुए निलंबित किया जा सकता है। हालांकि विश्वसनीय सूत्र तो ये बता रहे हैं कि उनके निलंबन में विलंब हो सकता था मगर हाल ही में आयोजित तेजा मेले की भव्यता पालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल पर भारी पड़ रही है, राज्य में कांग्रेस सरकार होने के बावजूद पालिका के भाजपा बोर्ड द्वारा पालिकाध्यक्ष मित्तल की अगुवाई में आठ दिवसीय मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उमड़ा हुजूम कांग्रेस नेताओं को हजम नहीं हो पा रहा है। वहीं तेजा मेला के आमंत्रण पत्र में भाजपा नेताओं के नामों पर कांग्रेस नेताओं के नाम की चिप्पी लगाने से कांग्रेस के स्थानीय नेताओं में पैदा हुईं नाराजगी व शहर की काजीपुरा बस्ती में सड़क निर्माण कार्य नहीं होने के मामले में बस्ती के लोगों द्वारा ढ़ोल बजाकर पालिका प्रशासन व सरकार के खिलाफ किए गए प्रदर्शन से कांग्रेस नेताओं की नाराजगी उनके शीघ्र सम्भावित निलंबन का कारण माने जा रहे हैं। कुछ कांग्रेसियों का आरोप है कि ढ़ोल बजाकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ किये गए प्रदर्शन में पालिकाध्यक्ष मित्तल का हाथ था। यह प्रदर्शन समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहा जिससे सरकार की व कांग्रेस नेताओं की किरकिरी हुई है। खैर कुल मिलाकर कारण कुछ भी रहे हों, मगर तीन माह बाद ही दुबारा अगर पालिकाध्यक्ष का निलंबन होता है तो लोग इसे द्वेषतापूर्ण कार्यवाही ही समझेंगे। मित्तल के दुबारा निलंबन की शहर में चल रही चर्चाओं पर कुछ भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और वह द्वेषतावश भाजपा बोर्ड के पालिकाध्यक्ष को दुबारा निलंबित करना चाह रही है जो कांग्रेस सरकार की ओछी मानसिकता का परिचय है। इन भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि अगर कांग्रेस सरकार पुनः पालिकाध्यक्ष को निलंबित करती है तो भाजपा चुप बैठने वाली नहीं इस बार पहले से अधिक मजबूत तरीके से व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। ध्यान रहे पहले भी पालिकाध्यक्ष के निलंबन के विरोध में केकड़ी शहर बंद रहा था। खैर फिलहाल पालिकाध्यक्ष के निलंबन की चर्चाएं व अटकलें ही है, सरकार या विभाग की ओर से कोई स्पष्ट संकेत नहीं है। इधर इन चर्चाओं और कयासों के आधार पर कांग्रेस पार्षदों की बाछें खिल गई है उन्हें उम्मीद है कि अगर पालिका अध्यक्ष मित्तल का निलंबन होता है तो सरकार उनमें से किसी एक को मौका दे सकती है, वहीं भाजपा के एक पार्षद भी इन दिनों कांग्रेस नेताओं के लगातार संपर्क में है वह गत दिनों सदर बाजार में कुछ लोगों के बीच ऐलानिया घोषणा कर चुके हैं कि पालिकाध्यक्ष तो वो ही बनेंगे। खैर ये सब बातें फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। बहरहाल देखना ये है कि पालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या नहीं या फिर किसी ओर पार्षद की किस्मत जोर मारती है। वैसे अगर पालिकाध्यक्ष मित्तल को निलंबित किया जाता है तो नियमानुसार उपाध्यक्ष को ही कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण कराया जाएगा, जैसा कि पिछली बार हुआ था। मगर यह सरकार की मंशा पर भी निर्भर करता है कि वह चाहे तो किसी अन्य पार्षद को भी दो माह के लिए कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में पदभार सौंप सकती है, भले ही बाद में नियमानुसार बहुमत साबित करना पड़े !

तिलक माथुर 9251022331*

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