निजी बसों की मनमानी पर अंकुश लगाए सरकार- देवनानी

प्रो. वासुदेव देवनानी
अजमेर, 4 मार्च। पूर्व षिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने बुधवार को राजस्थान विधानसभा में अजमेर शहर में निजी यात्री बस संचालकों द्वारा अपनी मनमानी करते हुए शहर के बीच में अनाधिकृत स्थानों से बसें संचालित किये जाने से शहर की यातायात व्यवस्था बिगड़ने का मामला उठाया।
विधायक देवनानी ने विधान सभा में यह मामला उठाते हुए कहा कि अजमेर स्मार्ट सिटी बनने जा रहा है लेकिन अजमेर की ट्रेफिक पुलिस व परिवहन विभाग व्यवस्थाओं में पलीता लगाने में जुटे हुए है। आज अजमेर में यातायात व्यवस्था बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है लेकिन यातायात पुलिस व परिवहन विभाग की अनदेखी व ढ़िलाई के चलतेे निजी यात्री बस आपरेटरों द्वारा शहर के बीच में 15 से अधिक स्थानों पर अवैध तरीके से 50 से अधिक बसे खड़ी कर बैखोफ संचालन किया जा रहा जिससे शहर की यातायात व्यवस्था बिगड़ रही है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग द्वारा निजी यात्री बसों को अजमेर के परमिट जारी किये गये है लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इनके लिए नौसर घाटी के नीचे निर्मित प्राईवेट बस स्टेण्ड को निर्धारित किया हुआ है किन्तु वहां पर एक-दों बसें ही खड़ी होती है।
देवनानी ने सरकार से कहा कि ट्रेफिक पुलिस व परिवहन विभाग इस मामले में हमेशा एक-दूसरे पर अपनी जिम्मैदारी डाल कर मामला टालने का प्रयास करते है जो कि ठीक नहीं है। सरकार इस मामले की जिला कलेक्टर को मानिटरिंग करने के निर्देश दे तथा दोनों विभागों के समन्वय से निजी बसों के शहर में अनाधिकृत खड़े रहने पर रोक लगाई जाएं। उन्होंने कहा कि ट्रेफिक पुलिस को पाबंद किया जाए कि शहर में प्रवेश के जो मार्ग है निजी बसों को वही पर रोक दिया जाए। इन स्थानों पर ट्रेफिक पुलिस तैनात भी रहती है । उन्होंने कहा कि अनाधिकृत स्थानों पर खड़ी होने वाली बसों के एक बार चालान काटने के बाद भी यदि वो बसें फिर से शहर में खड़ी पाई जाती है तो उनके परमिट निरस्त करने जैसी सख्त कार्यवाही की जाए।
उन्होंने कहा कि निजी बसों के शहर में प्रवेश कर अनाधिकृत स्थानों पर खड़े होने से शहर की यातायात व्यवस्था बिगड़ रही है व इससे दुर्घटनाओं की आंशका भी बनी रहती है जिससे शहरवासी बहुत परेशान है। निजी बसों से रोडवेज का यात्री भार भी प्रभावित हो रहा है क्यों कि ये बसें रोड़वेज बस स्टेण्ड के सामने ही नहीं बल्कि आस-पास के क्षेत्र में भी खड़ी रहती है।
उन्होंने कहा कि निजी बसें नौसर स्थित निर्धारित बस स्टेण्ड पर खड़ी नहीं होकर कलेक्ट्रेट के बाहर, पुलिस लाईन, बस स्टेण्ड के सामने व साईड में, पुरानी आरपीएससी के बाहर, आजाद पार्क, सावित्री चैराहा, जवाहर रंगमंच तिराहा, शास्त्रीनगर रोड, आनासागर चैपाटी, हजारी बाग, श्रीनगर रोड आदि स्थानों पर खड़ी रहती है। शहर के गौरव पथ जहां पर आनासागर चैपाटी निर्मित है तथा बड़ी संख्या में रोजाना पर्यटकों व क्षेत्रवासियों का आना होता है व मार्ग पर यातायात का भारी दबाव भी रहता है उस स्थान को भी निजी बसों ने अनाधिकृत स्टेण्ड बना रखा है। इसके अलावा तोपदड़ा स्थित शिक्षा संकुल परिसर से निकलने वाले मार्ग पर भी निजी बस आपरेटरों ने अवैध पार्किंग बना ली है।

सरकारी विद्यालयों पर चैथाई बजट भी नहीं खर्च कर पाई सरकार-देवनानी
जयपुर, 4 मार्च।
पूर्व षिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि सरकार प्रदेष के राजकीय विद्यालयों को दुरूस्त करने का केवल हो-हल्ला करती है जबकि हकिकत कुछ और ही है। राजकीय विद्यालयों में नवाचार करना तो दूर विगत बजट में राजकीय विद्यालयों के ढांचागत निर्माण के लिए प्रस्तावित बजट भी पूरा खर्च नहीं कर पाई। विगत बजट में करोडों रूपये खर्च करने का ढिंढोरा पीटकर थोथी वाहवाही लूटने वाली सरकार राजकीय विद्यालयों पर महज तेरह फीसदी राषि ही खर्च कर सकी।
पूर्व शिक्षा मंत्री देवनानी ने कहा कि उनके द्वारा विधान सभा में पूछे गये तारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया है कि विगत बजट में सरकारी विद्यालयों में ढांचागत निर्माण के लिए 1581.83 करोड रू. खर्च करना प्रस्तावित था। इस राषि में आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए चैदह हजार से अधिक कक्षा कक्ष, प्रयोगषाला, पुस्तकालय कक्ष, 23 नवीन भवन एवं 83 भवनों की वृहद मरम्मत किया जाना था। सरकार ने तब इसको लेकर समाचार पत्रों के माध्यम से खूब वाहवाही बंटोरी थी लेकिन इस पूरे सत्र में सरकार केवल 205.22 करोड ही खर्च कर पाई। जनता के सामने बनाए कागजी महल धरासायी हो गए।
देवनानी ने कहा कि इस राषि को संबंधित मदों पर खर्च करना तो दूर जिन विद्यालयों में यह बजट खर्च करना था उसके टेण्डर और कार्यादेष तक जारी नहीं किए गए। अभी भी इन कामों को पूरा होने में दो साल और लगेगे। षिक्षा मंत्री द्वारा तारांकित प्रष्न पूछने के बदले दिए गए जवाब तो कुछ ऐसा ही बयां कर रहा है। उन्होंने मार्च 2022 तक यह सम्पूर्ण राषि खर्च करने की संभावना जताई गई है।

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