सिन्ध मिलकर अखण्ड भारत बनेगा-महामण्डलेश्वर हंसराम
सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन की 1351वीं जयंती पर राष्ट्रीय परिचर्चा सम्पन्न
कल 25 अगस्त को होगें दाहरसेन की मूर्ति पर श्रृद्धासुमन अर्पित
अजमेर 24 अगस्त। सिन्ध के बिना हिन्द की कल्पना अधूरी है। आज हम रक्षा नीति पर चर्चा करेगें तो हमें सिन्ध व महाराजा दाहरसेन को समझना होगा। सिन्ध जहां वेदों की रचना हुई जहां का वास्तुशास्त्र पूर्ण विकसित था और हमारे राष्ट्रगान में सिन्ध है वह सिन्ध हमारा अभिन्न अंग है। शाह के रसाले का अध्ययन करेगें तो शाह लतीफ ने कहा कि महाराजा दाहरसेन के साथ हिंगलाज माता के दर्शन किये और कहा कि मुझे तो खुदा के दर्शन हिंगलाज माता में दिखे। हमें सिन्ध, सिन्धु व हिन्दुस्तान में कोई विभाजन नहीं दिखता। हमारी संसद ने ऐसी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किया जो प्रदेश हमारे पास नहीं है और सिन्धी भाषा के सर्वंद्धन के लिये हमें मिलकर प्रयास करने है। हम सिन्ध की अस्मिता के लिये सदैव लडेेगें और महाराजा दाहरसेन स्मारक अजमेर देश दुनिया में एक प्रेरणा का केन्द्र बना है। ऐसे विचार सिन्धुपति महाराजा द्ाहरसेन विकास व समारोह समिति द्वारा महाराजा दाहरसेन के 1351वीं जयंती पर आॅनलाइन राष्ट्रीय परिचर्चा में मुख्य वक्ता पूर्व सांसद श्री ओंकारसिंह लखावत ने प्रकट किये।
महामण्डलेश्वर हंसराम उदासीन ने आर्शीवचन देते हुये कहा कि वर्तमान परिस्थिति में सिन्ध मिलकर अखण्ड भारत बनेगा और सिन्ध में जो हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहे हैं मैं चाहूंगा भारत सरकार इसको गंभीरता से कदम उठाये और वहां से प्रताडित होकर आने वाले नागरिको को नागरिकता देने का कार्य हो रहा है वह निश्चित ही सराहनीय है। महाराजा दाहरसेन के जीवन पर आयोजित संगोष्ठी से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।
वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सुन्दर भट्ट उदयपुर ने कहा कि सिन्ध की सीमायें वर्तमान अफनागिस्तान सहित दुनिया के कई देशों से मिलती थी और विदेशी आक्रमाणकारी कभी भी युद्ध जीतकर आगे नहीं बढ सके और महाराजा दाहरसेन ने अन्य राजाओं से मिलकर विदेशियों को खदेडा और इस पर शोध निरंतर जारी है।
इण्डस वैली रिर्सच इंस्ट्टीयूट के निर्देशक रघुवीर सिंह सोढा जोधपुर ने कहा कि वर्तमान सिन्ध व हिन्द में कई समानताये है जो हमारी संस्कृति को जोडे हुये है और दुनिया में कहीं भी हम रहे सिन्ध की पवित्र संस्कृति से ही हमारी पहचान बनी है और व्यापार के साथ विश्व बन्धुत्व को समझा है।
शुरूआत में चर्चा का संचालन समिति के कवंल प्रकाश किशनानी ने करते हुये कहा कि कोरानावायरस के कारण हम यह आॅनलाइन परिचर्चा कर रहे है और महाराजा दाहरसेन के बलिदान दिवस, जयंती व अन्य कार्यक्रमोें को देश दुनिया में युवाओं तक जोडने का प्रयास किया जा रहा है और ऐसे विषयों के लगातार आयोजन से प्रेरणादायी कार्य किया जायेगा। भारतीय सिन्धु सभा के राष्ट्रीय मंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने आभार प्रकट करते हुये कहा कि ऐसे महापुरूष के बलिदान की गौरव गाथा को भारत सरकार की ओर से पाठयक्रम में जोडने की अपील की।
उक्त आयोजन अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम अजमेर, पर्यटन विभाग, सिन्धु शोधपीठ म.द.स.विश्वविद्यालय व भारतीय सिन्धु सभा के सहयोग से आयोजित किये जाते हैं।
कल 25 अगस्त जयंती कार्यक्रम
समन्वयक मोहन तुलस्यिाणी ने बताया कि कल 25 अगस्त सुबह 9 बजे से महाराजा दाहरसेन के 1351वीं जयंती के उपलक्ष में सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन स्मारक, अजमेर पर हिंगलाज माता पूजन के साथ महाराजा दाहरसेन की मूर्ति पर श्रृद्धासुमन अर्पित किये जायेगें।
समन्वयक,
मो 9413135031