
देवनानी ने कहा कि भारत को लूटने और कब्जा करने के लिए पश्चिम के रेगिस्तानों से आने वाले मजहबी हमलावरों का वार सबसे पहले सिन्ध की वीरभूमि को ही झेलना पड़ता था। इसी सिन्ध के राजा थे दाहरसेन जिन्होंने सिन्धु सभ्यता व संस्कृति के साथ ही राष्ट्र की रक्षा के लिए युद्धभूमि में लड़ते हुए प्राणाहुति दी। उनके बाद उनकी पत्नी, बहन व दोनों पुत्रियों ने भी राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। उन्होंने कहा कि महाराजा दाहरसेन व उनके सम्पूर्ण परिवार ने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहूति दी तथा विदेशी आक्रमणकारियों को आगे नहीं बढ़ने दिया।