अजमेर 31 अगस्त 2020 – अजमेर के विधायक महंगी बिजली के विरोध मे तो हल्ला बोल रहे है लेकिन साथ ही केंद्र से पेट्रोल, डीजल और गैस के बढ़ते दामो को कम करने के की मांग भी करे और जब राजस्थान में भाजपा की सरकार थी, तब अजमेर की विधुत विभाग का निजीकरण कर दिया गया उस समय क्यो चुप थे अजमेर के विधायक महोदय जी। अजमेर बिजली का निजीकरण करने मे भाजपा सरकार का ही हाथ था।
यह जानकारी देते हुए डॉ. सुनील लारा ने बताया कि जब भाजपा की सरकार निजीकरण कर रही थी तब अजमेर के विधयाक चुप क्यों थे तब उन्हें जनता का ख्याल क्यों नही आया और उस समय कांग्रेस ने ही लम्बे समय तक निजीकरण नहीं होने का विरोध प्रदर्षन किया लेकिन कोई भी विधायक व भाजपा का नेता उस समय जनता के साथ नहीं आया और अजमेर के विधायको व भाजपा सरकार ने अपनी की बिजली को प्राईवेट के हाथो बेच दिया। निजिकरण होने से लगातार जब से निजीकरण हुआ है तब से लगातार बिजली के बिलों मैं इतनी व्रद्धि होती आ रही थी तब इन्हें याद नही आया जनता का और एक भी छोटी खराबी होने का भी पैसा भी विधुत विभाग उपभोक्ता से वसूल कर राह है। अजमेर की तर्ज पर पुनः भाजपा सरकार सत्ता में आती तो राजस्थान की सम्पूर्ण विधुत विभागो का निजिकरण होता तब क्या विधायक महोदय आवाज उठाते। अजमेर के भाजपा के दोनों विधायक अजमेर की विधुत निजीकरण को तो रोक नही पाये जब निजीकरण होगा तो कम्पनिया मनमानी करेगी ही, ओर जनता जानती है निजीकरण सभी विभागों का भाजपा सरकार द्वारा किया जा रहा है चाहे रेलवे हो, स्टेशन, हो एयरपोर्ट हो, या कोई सरकारी इमारत, जैसे कि भारत की धरोहर लाल किला, तो ये तो जनता जानती है, महंगाई कोन बढ़ा रहा है। दामो में कमी का विरोध हो अच्छी बात है लेकिन बढ़ोतरी का विरोध सभी आवश्यक वस्तुओं के लिये भी हो जो केंद्र सरकार बढाती जा रही है।