वाल्मीकि जयंती पर हुई काव्य गोष्ठी

साहित्य परिषद् करेगी अजयमेरु त्रिविधा का प्रकाशन

अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, अजमेर द्वारा शरद पूर्णिमा एवं वाल्मीकि जयंती के अवसर पर गूगल मीट पर आयोजित काव्य-गोष्ठी का शुभारंभ परिषद् गीत के साथ किया गया। पौराणिक विषयों के लेखक देवदत्त शर्मा ने वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये प्रचेता वरुण के पुत्र थे। क्रोंच-वध की घटना से विदीर्ण हुए ह्रदय से उत्पन्न प्रथम श्लोक के प्रसंग को बताते हुए वरिष्ठ साहित्यकार उमेश चौरसिया ने रामायण की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि श्री राम द्वारा लक्ष्मण को कहे सन्देश ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
डॉ. अंजू कल्याणवत ने “पुष्कर के गऊघाट पर बुदबुदाते हुए मन्त्रों का पाठ”, डॉ. छाया शर्मा ने “इस दुनिया की रंग भूमि पर शरद पूनम का निकला है चाँद”, देवदत्त शर्मा ने “धरती के बेटी रोते-रोते धरती की गोद में समाई”, डॉ. बृजेश माथुर ने “याद की एक बहार में गुजरा, आज का दिन खुमार में गुजरा”, डॉ. राजेश शर्मा ने “प्रकृति चित्रण” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस अवसर पर परिषद के तत्वावधान में अजमेर के साहित्यकारों की गद्य, पद्य एवं चम्पू (मिश्रित काव्य ) रचनाओं के संकलन की एक पुस्तक अध्यक्ष गंगा धर शर्मा ‘ हिन्दुस्तान’ के संपादन में ‘अजयमेरु त्रिविधा’ नाम से प्रकाशित करने का निर्णय भी लिया गया। पुस्तक के लिए 21 नवंबर तक रचनाऐं प्राप्त की जाएंगी। विभाग संयोजक कुलदीप रत्नू ने “खिला हुआ गगन में चंदा बरस रही अमृत धारा”, डॉ.चेतना उपाध्याय ने “इस प्यारे से संसार में समस्याएँ इंसान को इंसान बनना सिखाती हैं” गंगा धर शर्मा ‘हिन्दुस्तान ने “यह भारत का सैनिक है, जसवंत सिंह कहलाता है” उमेश चौरसिया ने “नव प्रभात हो मिटे अँधेरा, इक नन्हा सपना है मेरा” कविता प्रस्तुत की।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ हुआ।

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