सीएम करे हस्तक्षेप, पंचायत सहायकों को शीघ्र दे मानदेय:देवनानी

प्रो. वासुदेव देवनानी
अजमेर, 26 नवम्बर। पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री एवं विधायक अजमेर उत्तर वासुदेव देवनानी ने प्रदेश के 27 हजार पंचायत सहायकांे को पिछले 6 माह से मानदेय का भुगतान नहीं करने पर इसे राज्य सरकार की असंवेदनशीलता बताते हुए मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए शीघ्र ही बकाया मानदेय दिलाये जाने की व्यवस्था कराए।
देवनानी ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय पंचायत सहायकों को 6 हजार रूपये मासिक मानदेय देना शुरू किया गया था तब से ये राजकीय विद्यालयों व पंचायतों मंे अपनी सेवाए निष्ठापूर्वक दे रहे है। वर्तमान सरकार ने अपने दो साल के शासन में इनके मानदेय में कोई बढ़ोतरी करने अथवा इन्हें नियमित करने के सम्बंध में तो कोई कदम उठाया नहीं बल्कि इनको पहले से ही मिल रहे मानदेय का भुगतान भी पिछले 6 माह से अटका रखा है।
उन्होंने कहा कि मानदेय की अल्प राशि भी नियमित रूप से नहीं मिलने पर प्रदेश में कार्यरत पंचायत सहायक व उनके परिवार किन परिस्थितियों में अपना जीवन यापन कर रहे होंगे यह विचारणीय ही नहीं चिन्तनीय भी है। पिछले 6 माह से इनके मानदेय भुगतान का मामला पंचायतीराज व शिक्षा विभाग के बीच उलझा होना राज्य सरकार के अमानवीय चेहरे को उजागर करता है।
देवनानी ने कहा कि सरकार के मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री को दो विभागों के बीच उलझे मामले में हस्तक्षेप करते हुए पंचायत सहायकों को मानदेय की बकाया राशि के तत्कालएकमुश्त भुगतान एवं भविष्य में नियमित भुगतान की व्यवस्था करानी चाहिए।

संवैधानिक अधिकारों से ज्यादा कत्र्तव्यों के पालन की जरूरत:देवनानी
– संविधान दिवस पर श्रेष्ठ व आत्मनिर्भर भारत निर्माण के संकल्प का आव्हान

अजमेर, 26 नवम्बर। पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री एवं विधायक अजमेर उत्तर वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारत का संविधान हमें मौलिक अधिकार प्रदान करता है किन्तु वर्तमान में ज्यादा जरूरत संविधान द्वारा निर्धारित कत्र्तव्यों के पालन करने की है।
देवनानी ने संविधान दिवस के अवसर पर क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि आज ही के दिन 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान तैयार करने वाली संविधान सभा ने इसे अंगीकार किया था। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस महत्वपूर्ण दिवस को संविधान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की तथा डाॅ भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयन्ति के अवसर पर पहली बार 26 नवम्बर 2015 को संविधान दिवस मनाया गया।
देवनानी ने कहा कि वर्तमान में देश के समक्ष जो चुनौतियां है और जिन लक्ष्यों को लेकर देश आगे बढ़ रहा है उसके लिए आवश्यक है कि नागरिकों में देश के प्रति अपने कत्र्तव्यों की भावना जागृत हो। उन्होंने संविधान दिवस के अवसर पर युवाओं व समस्त नागरिकों का आव्हान किया कि वे आज के दिन नये, श्रेष्ठ व आत्मनिर्भर भारत निर्माण का संकल्प ले तथा इसके लिए वे अपने सवैंधानिक कत्र्तव्यों के प्रति पूर्णतः गंभीर, सजग व सचेत रहे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारा संविधान हमें 6 मूलभूत अधिकार प्रदान करता है। समता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरूद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति व शिक्षा संबंधी अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार। ये सभी अधिकार तो हमारे पास है परन्तु हमारा संविधान नागरिकों के लिए कुछ मौलिक कत्र्तव्य भी निर्धारित करता है। यदि हम अपने नागरिक कत्र्तव्यों को आत्मसात करते हुए उनके अनुरूप ही अपने कार्य-व्यवहार सम्पादित कर सके तो श्रेष्ठ व आत्मनिर्भर भारत निर्माण के रास्ते में कोई बाधा नहीं आ सकती।

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