गाँधी आज भी जीवित हैं

साहित्य के रक्षक व आधुनिक गाँधी के नाम से प्रसिद्ध शमशेर भालू खान ने विश्व विख्यात सूफी-संत हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह में की ज़ियारत। शमशेर भालू खान को ज़ियारत समाज सेवी, ख़ादिम सैय्यद मुनव्वर चिश्ती साहब ने कराई। वर्तमान युग में जहाँ एक ओर सरकार से अपनी बात मनवाने के लिए लोग विभिन्न प्रकार के प्रदर्शन करने के तरीके अपनाते हैं, वहीं दूसरी ओर शमशेर भालू खान ने इस कड़ाके की ठंड में पैदल दांडी यात्रा के माध्यम से, बिना किसी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए अपने समाज की माँगों को सरकार से मनवाने के लिए अहिंसा के परम भक्त महात्मा गाँधी के मार्ग का अनुसरण किया।

मुस्लिम समाज की कई मांगों को लेकर शमशेर भालू खान ने चूरु कलेक्टर मुख्यालय से पैदल दांडी यात्रा की शुरुआत की थी। चूरु से ठाकुर शमशेर 1090 किलोमीटर पैदल दांडी यात्रा (Dandi Yatra) पर निकले थे।
यात्रा का उद्देश्य – मुस्लिम समाज में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता उतपन्न करना था

शमशेर भालू खान ने राजस्थान सरकार से यह माँगे की थीं-
1- मदरसा पैरा टीचरों को तृत्य श्रेणी अध्यापक के समान वेतन पर स्थाई करना।
2- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350 अ को लागू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त गुजराल समिति की रिपोर्ट की अनुपालना में मंत्री मण्डलीय समिति को रिपोर्ट के अनुसार निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा बीकानेर द्वारा जारी सरकुलर -शिविरा / शिक्षक / संस्थान/ F-6/1319/04 दिनांक 13-12-2004 को अक्षरस लागू करना जिसमें अल्पभाषाएँ ( उर्दू पंजाबी गुजराती सिंधी के शिक्षण सम्बन्धी दिशा निर्देश हैं)
3- सभी राजकीय महाविद्यालयो में उर्दू संकाय स्वीकृत करना ।
तीनों माँगों में से केवल पहली माँग (मदरसा पैरा टीचर्स को नियमित करने पर सहमति नहीं बन पाई, जबकि मदरसा पैरा टीचर्स के मेडिकल क्लैम व मेडिकल पालिसी जैसी माँग पर सहमति बन गयी ) को छोड़कर शेष सभी माँगों पर बनी सहमति।

शमशेर भालू खान ने केंद्र सरकार से यह माँग की है:-
अल्पभाषा आयुक्तालय नई दिल्ली जो कि चार वर्षों से मृत प्रायः है को पुनर्जीवित करना और वहाँ पर रिक्त आयुक्त व अन्य पदों को भरा जाना व अल्प भाषा सम्बन्धी रिपोर्ट राष्ट्रपति के माध्यम से संसद के सदन के पटल पर प्रस्तुत कर सुरक्षा के उपाय करने पर विचार करे. अल्पसंख्यक मामलात विभाग के अंतरगत पंद्रह सूत्री कार्यक्रम को वास्तविक धरातल पर अमल में लाया जाए।
इस के लिए यदि सरकार यह माँगे नहीं मानती है तो जयपुर में मुस्लिम समाज द्वारा अनिश्चितकाल के लिए धरना (Dandi Yatra) दिया जाएगा और स्वयं शमशेर भालू खान ने अनिश्चितक़ालीन आमरण अनशन की चेतावनी दी है।

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