
कीर्ति पाठक जी कहना था कि जवाहर लाल नेहरू अस्पताल एक बीमार अस्पताल है और इस की बीमारी ने स्थानीय प्रशासन को भी जकडा हुआ है।
जेएलएन में वेंटिलेटर जलना आकस्मिक घटना , कोई दोषी नहीं मगर व्यवस्थाओं में सुधार ज़रूरी।
आज के समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपे इस समाचार ने अजमेर प्रशासन व अस्पताल प्रबंधन / कुप्रबंधन की साँठ गाँठ को उजागर कर दिया है।
* जब एक लम्बे अरसे से कोई रखरखाव हुआ ही नहीं तो क्या इस के लिए अजमेर प्रशासन व अस्पताल प्रबंधन दोषी नहीं ?
* जब संभाग के सब से बड़े अस्पताल में बिजली व्यवस्था सिर्फ़ एक ठेकेदार , जिस के सिर्फ़ तीन इलेक्ट्रिशन हैं , के भरोसे है तो क्या ये अजमेर प्रशासन व अस्पताल प्रबंधन का दोष नहीं ?
* जब जाँच कमिटी ये मान रही है कि व्यवस्थाओं में सुधार ज़रूरी है तो व्यवस्थाओं के लिए दोषी व्यक्ति / व्यक्तियों पर कार्यवाही करने की रिपोर्ट देने से क्यूँ बच रही है?
* यदि व्यवस्था ख़राब है तो कोई दोषी भी है – simple
* मेडिकल स्टाफ़ ने स्थिति सम्भाली – मंज़ूर है – सम्भाली भी होगी – ये उन की ड्यूटी है।
* पर अस्पताल प्रबंधन ने जो रखरखाव में कोताही की उस की गाज उन पर क्यूँ नहीं गिरनी चाहिए ?
* पीडब्ल्यूडी ने जब रखरखाव नहीं हो रहा था उस की जानकारी क्यूँ नहीं दी ? और यदि PWD के अधिकारियों ने रखरखाव ना होने की जानकारी दी थी तो किस को दी और उस पर क्या कार्यवाही हुई या क्यूँ कार्यवाही नहीं हुई इस की रिपोर्ट इस जाँच समिति ने क्यूँ नहीं दी ?

साथ ही आम आदमी पार्टी कलेक्टर महोदय से निवेदन करती हैं कि जो भी नुकसान अस्पताल प्रशासन को हुआ है उसका भुगतान जो इस में जिम्मेदार हैं उन से वसूला जाए जिस से आने वाले कोई भी ऐसे हादसे से सबक मिल सके।
मीना त्यागी
ज़िला अध्यक्ष
AAP अजमेर