आजकल देखने में आ रहा है कि महामारी में पार्षद, सांसद , महापौर, विधायक अथवा राजनीतिक नियुक्तियों का लाभ लेने वाले व्यक्ति जनप्रतिनिधि फंड में से इस महामारी में सहायता राशि आवंटन कर रहे हैं । यह धनराशि तो जनता की है जो उनको जनप्रतिनिधि होने के कारण सरकार द्वारा दी जाती है जो विकास कार्य अथवा इसी प्रकार के किसी काम में खर्च कर सकें l परंतु इसमें उनका निजी योगदान कुछ भी नहीं है।
कांग्रेस के वरिष्ठ युवा नेता व मानव अधिकार परिषद के अध्यक्ष शैलेश गुप्ता ने मांग की है की जनप्रतिनिधि अपने निजी खातों कुछ में से कुछ राशि इस महामारी में सहायता हेतु दें तो शायद यह एक नई पहल होगी और इसका हर नागरिक आम जनता भी स्वागत करेगी । जन प्रतिनिधियों को अपने निजी खातों में से अधिक से अधिक राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा करानी चाहिए ताकि उसका लाभ इस कठिन वक्त में प्रदेश के लोगों को प्राप्त हो!