केकड़ी 24 अगस्त (पवन राठी)शहर में वाहन चोरों का आतंक निर्बाध रूप से जारी है।शहर में औसतन 3-4 दुपहिया वाहन रोज वाहन चोरों के शिकंजे में जा रहे है।
शहर के भीड़ भाड़ वाले इलाको पर शातिर वाहन चोरों की पैनी निगाहे लगी रहती है और मौका मिलते ही ये शातिर वाहन उठाकर नो-दो ग्यारह हो जाते है।भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में प्रमुख रूप से जिला अस्पताल बस स्टैंड कोर्ट परिसर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जूनिया गेट सहित अन्य कई क्षेत्र शामिल है।अक्सर पब्लिक भी इन वाहन चोरियों में अपना योगदान देने में पीछे नही है क्योकि पार्किंग के कुछ पैसे बचाने के चक्कर में वे अपना वाहन लावारिश हालात में खड़ा करके चले जाते है जिससे वाहन चोरों को आसानी से वाहन चुराने का मौका मिल जाता है।इस प्रकार आमजन भी वाहन चोरों के मंसूबो को पूरा करने में सहभागी बने हुए है।
आलम यह हो चुका है कि पुलिस जब तक पिछली चोरियों का पर्दाफाश करती है तब तक वाहन चोर अनेको नई चोरियों को अंजाम दे कर तू डाल डाल मैं पात पात की कहावत को चरितार्थ करके पुलिस को चिढ़ाने से बाज नही आ रहे है।
आंकड़ो की यदि बात करे तो जुलाई2021 में लगभग दो दर्जन और अगस्त में अब तक लगभग डेढ़ दर्जन वाहन ये शातिर वाहन उड़ा चुके है।औसतन3से 4 वाहन प्रतिदिन शहर में उड़ाए जा रहे है।
इसका मतलब ये नही की केकड़ी पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है।पुलिस अपने दायित्वों का भली भांति निर्वहन कर रही है।हाल ही में केकड़ी पुलिस ने दो शातिर वाहन चोरों को गिरफ्तार करके 26 वाहन भी जप्त किये थे।इसके बावजूद भी पुलिस की भी कुछ सीमाएं है उसको भी अपने इन्वेस्टीगेशन में अनेक एंगेल्स पर ध्यान देना होता है ऊपर से विभिन्न कानूनी प्रावधानों की भी पालना उनको करनी होती है ।
जनता की पुलिस से अपेक्षाएं बहुत है वो चाहती है की रिपोर्ट लिखवाते ही पुलिस उनका वाहन ढूंढ निकाले !
अब कौन समझाए इनको की पुलिस कोई अलादीन का चिराग तो है नही जो तत्काल जनता की हर मांग पूरी कर सके ।पुलिस में भी आम जनता से ही भर्ती की जाती है।
सावधान रहें पुलिस का सहयोग करे
=======================
बढ़ती वाहन चोरियों पर लगाम लगाने के लिए यह जरूरी है कि आम जन सावधान और जागरूक रहे और अपने लोकतांत्रिक देश के सभ्य नागरिक होने के दायित्वों का भली भांति निर्वहन करे निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही वाहन को पार्क करे।किसी भी अप्रिय वारदात की पुलिस को अविलंब सूचना दे अनजान व्यक्तियों के बारे में पुलिस को सूचना दे और पुलिस का सहयोग करे।
लोकतंत्र में अधिकारों के साथ साथ अपने दायित्वों का भी निर्वहन करे।
यदि आमजन पूरी तरह जागरूक हो तो मुट्ठीभर चोरों की हिम्मत नही की वो ऐसी वारदातों को अंजाम दे सके।