– राजनीतिक बयानबाजी, अमर्यादित व असंवैधानिक भाषा का प्रयोग करने पर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष जारोली पर जमकर बरसे देवनानी
-देवनानी ने कहा, ऐसे व्यक्ति को बोर्ड अध्यक्ष पद पर रहने का कोई हक नहीं, सरकार उन्हें तुरंत करे बर्खास्त
-रीट पेपर लीक मामले में बुलाई प्रेस काॅन्फें्रस में कांग्रेसी एजेंट बनकर दिया जारोली ने राजनीतिक बयान
-मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास, मुख्य सरगना के कांग्रेसी नेताओं के साथ संपर्क, एक विधायक ने सरकारी स्कूल में उसे बनाया अपना प्रतिनिधि

कोरे कार्यकाल पर कैसी टिप्पणी
देवनानी ने डाॅ. जारोली की राजनीतिक बयानबाजी पर पलटवार करते हुए मंगलवार को जारी बयान में कहा कि डाॅ. जारोली वर्ष 2020 में अध्यक्ष बने। इसके बाद अब तक उनका डेढ. वर्ष का कार्यकाल कोरोना की भेंट चढ़ा रहा। दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं हुई नहीं, ऐसे में जिस अध्यक्ष का कार्यकाल जीरो व नकारा रहा है उसकी कार्यप्रणाली पर कैसी टिप्पणी की जाती? इस तरह उनकी कार्यप्रणाली पर कोई भी टिप्पणी मान्य नहीं रखती।
रीट मामले में न्यायिक या सीबीआई जांच की मांग की
जहां तक डाॅ. जारोली के इस कथन का सवाल है कि पूर्व शिक्षामंत्री देवनानी ने भी पिछले डेढ़ साल में उनके कार्यकाल को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है, तो इस पर देवनानी ने स्पष्ट किया है कि रीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर वे पहले ही डाॅ. जारोली की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए सरकार से सीबीआई और न्यायिक जांच की मांग कर चुके हैं।
हमारे राज में तो कभी कोई पेपर लीक नहीं हुआ
देवनानी ने कहा कि इससे पहले रीट भाजपा के शासनकाल में भी रीट हुई थी, लेकिन कहीं भी कोई गड़बड़ी नहीं हुई। इसे देखते हुए देवनानी ने सवाल उठाया है कि आखिर ऐसी कौनसी स्थिति पैदा हो गई, जो अब कांग्रेस के राज में और कांग्रेसी बोर्ड अध्यक्ष के कार्यकाल में रीट पेपर लीक का इतना बड़ा प्रकरण उजागर हुआ है।
बत्तीलाल मीणा विधायक का नुमाइंदा
उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में एसओजी ने जिस मुख्य सरगना बत्तीलाल मीणा फरार है, जिसकी एसओजी तलाश कर रही है। वह ना केवल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आता-जाता रहा है, बल्कि कांग्रेस विधायक अशोक बैरवा ने तो उसे एक सरकारी स्कूल में अपना प्रतिनिधि भी बनाया है। बत्तीलाल मीणा की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा के साथ फोटोज भी सोशल मीडिया में उजागर हुए हैं। ऐसे में यह संदेह उत्पन्न होता है कि कहीं बत्तीलाल मीणा के तार बोर्ड अध्यक्ष डाॅ. जारोली तक जुड़े हुए तो नहीं हैं।
बोर्ड की साख में कर्मचारियों का त्याग, जारोली ने बट्टा लगाया
देवनानी ने कहा कि डाॅ. जारोली के अध्यक्षीय कार्यकाल में बोर्ड ऑफिस अप्रासंगिक बना रहा। परीक्षाओं पर फैसले राज्य सरकार लेती रही और डाॅ. जारोली सिर्फ विज्ञापन देने की एजेंसी बने रहे। ना परीक्षा शुल्क और ना परीक्षाओं को रद्द करने पर कोई फैसला ले पाए। देवनानी ने कहा, जहां तक डाॅ. जारोली बोर्ड की विश्वसनीयता की बात करते हैं, तो उन्हें यह भी स्पष्ट करना उचित है कि बोर्ड की अब तक जो साख और विश्वसनीयता बनी रही है, उसमें डाॅ. जारोली का कोई योगदान नहीं है, बल्कि यह बोर्ड के कर्मचारियों और अधिकारियों की निष्ठा और त्याग की भावना से सेवाएं देने का नतीजा है। डाॅ. जारोली ने बोर्ड की साख और विश्वसनीयता को बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन अफसोस इस बात का है कि इतना सब-कुछ होने के बावजूद डाॅ. जारोली अध्यक्ष के पद पर बैठै हुए हैं।
जारोली पहले खुद के शिक्षामंत्री की सोचें
देवनानी ने कहा, डाॅ. जारोली ने जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और सांसद किरोड़ीलाल मीणा पर राजनीतिक टिप्पणियां की हैं और जिस तरह अमर्यादित भाषा का उपयोग किया है, वह बेहद निंदनीय है। ऐसे अध्यक्ष को सरकार द्वारा तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे व्यक्ति राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर काम करने लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह एसओजी ने रीट पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तारियां की हैं और राज्य सरकार द्वार अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, उससे यह जाहिर होता है कि कहीं न कहीं बोर्ड अध्यक्ष की भूमिका भी संदिग्ध व संदेहास्पद हो सकती है। डाॅ. जारोली के कार्यकाल में पहली बार हुई इस बड़ी परीक्षा में पेपर लीक होने का मामला उजागर होने से बोर्ड की विश्सनीयता व साख को धक्का लगा है।
प्रियंका को प्रदेश के किसान किसान नहीं लगते?
भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी पर भी हमला बोला। देवनानी ने कहा कि श्रीमती गांधी की नजर में राजस्थान प्रदेश के किसान किसान ही नहीं है। गांधी द्वारा उत्तर प्रदेश में आंदोलनकारियों के पक्ष में तो भूख हडताल करने का स्वांग रचाया जबकि प्रदेश के हनुमानगढ में उन्हीं की कांग्रेस सरकार में किसानों पर लाठियां बरसाने पर भी मौन रहना इसका जीता जागता प्रमाण है।
देवनानी ने कहा कि कांग्रेस पिछले सत्तर सालों से किसानों के नाम पर ओछी राजनीति करती आई है, जो अभी भी जारी है। कांग्रेसी नेताओं की ओर से किसानों को अपने स्वार्थ के अनुसार उपयोग में लिया जा रहा है। यूपी के लखीमपुर खीरी और हनुमानगढ के मामले से ही आपको दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। प्रियंका गांधी किसानों के नाम पर राजनीति करते हुए यूपी में जनरल डायर का राज बताने तक नहीं चूक रही है जबकि हनुमानगढ में किसानों पर लाठियां बरसाने वाली कांग्रेस सरकार उसे ‘गांधीगीरी’ लग रही है। प्रियंका ऐसा कौनसा राजनीतिक चश्मा पहनती है जिसमें उत्तर प्रदेश के आंदोनकारी उसे किसान लगते हैं जबकि अपनी वाजिब मांगों को लेकर हनुमानगढ में आंदोलनरत किसान उसे किसान ही नहीं लगते।
उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी लखीमपुर खीरी में मरे आंदोलनकारियों को लेकर सिर पर आसमां उठा रखा है जबकि लखीमपुर में 4 अन्य कार्यकर्ताओं की हत्या पर वे मौन है। उनकी सुध कौन लेगा? क्या वे उत्तर प्रदेश के नागरिक नहीं है? यूपी में किसानों के नाम पर सस्ती लोकप्रियता बंटोरनेवाली प्रियंका जरा एक शब्द आंदोलनकारियों द्वारा मारे गए चार लोगों एवं हनुमानगढ में हुए किसानों पर लाठीचार्ज के बारे में बोलने का साहस करेगी? ऐसा दौहरापन कांग्रेस और उसके छुट्टभैया नेता कहां से लाते हैं यह निश्चित ही अबूझ पहेली है।
इधर देवनानी ने लखीमपुर में चल रहे किसान आंदोलन पर कहा कि किसान आंदोलन में घुसे अराजक तत्वों ने यह हिंसा का जो तांडव किया वह निन्दनीय है। किसानों को सुप्रीम कोर्ट पर विश्वास रखना चाहिए। जब तक कोर्ट का निर्णय नहीं आए तब तक आंदोलन स्थिगित रखना चाहिए।