
राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता की छाती पर छुरा घोंपा है। इस भाषण पर चुटकी लेते हुए देवनानी ने कहा कि जिस नेता को यह पता नहीं है कि छुरा छाती नहीं पीठ पर घोंपा जाता है और जिसे छाती व पीठ में अंतर ही पता नहीं है, वह देश चलाने की सोच भी कैसे सकता है। पहले राहुल गांधी को अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाना चाहिए, उसके बाद जनता के बीच में भाषण देना चाहिए।
देवनानी ने कहा कि कांग्रेस ने इसे ’’महंगाई हटाओ महारैली’’ नाम दिया था, लेकिन जनता ने इस रैली को पूरी तरह नकार दिया है। इसमें जनता की कोई भागीदारी नहीं रही, बल्कि कांग्रेसी लोग अपने-अपने क्षेत्रों से नरेगा व अस्थाई रूप से काम करने वाले श्रमिकों को वाहनों में भरकर लाए गए। हालांकि कांग्रेस ने इस रैली में एक लाख की भीड़ जुटाने का दावा किया था, लेकिन रैली स्थल पर महज 24 हजार कुर्सियां ही लगाई गई थीं। इससे जाहिर होता है कि खुद कांग्रेस को ही पहले से ज्यादा भीड़ जुटने का भरोसा नहीं था, इसके बावजूद कांग्रेस के बड़े नेताओं द्वारा पिछले कई दिनों से झूठे दावे किए जा रहे थे, जिनकी असलियत रविवार को सामने आ गई।
देवनानी ने भीड़ जुटाने के लिए पूरी तरह से सरकारी मशीनरी को झोंक दिया गया था। जिला और प्रादेशिक परिवहन अधिकारियों ने प्राइवेट वाहनों की जमकर धरपकड़ कर कांग्रेसियों को उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के राज में राजस्थान की जनता त्रस्त है। देश में सबसे महंगी बिजली राजस्थान में ही है। पेट्रोल-डीजल पर सर्वाधिक वैट व सबसे ज्यादा मंडी टैक्स इसी प्रदेश में वसूला जा रहा है। उसके बावजूद लोगों को ’‘महंगाई हटाओ‘’ का नारा देकर कांग्रेस प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। सबसे ज्यादा महंगाई वाले प्रदेश की ’’महंगाई हटाओ महारैली‘‘ जिस तरह से फ्लाॅप हुई है, उससे यही जाहिर होता है कि यह रैली ‘‘कांग्रेस हटाओ महारैली‘‘ साबित हो जाएगी।