जीवन को जयवंत बनाए

गणिनी आर्यिका गुरु मां 105 श्री संगममति माताजी ने कहा कि जीवन को जीते तो सभी है लेकिन जयवंत हर कोई नहीं बनाता भोग विलास मैं जीवन को लगाकर मनुष्य अपने जीवन को गलत दिशा में मोड़ लेता है सार्थकता इसी में ही है कि जीवन को धर्म में लगाएं और धर्म ही ऐसा मार्ग है जहां से जीवन जयवंत हो सकता है परम पूज्य संगम मति माताजी ने आज यह प्रवचन आनंद नगर जैन मंदिर में दिए प्रात काल 9 जुलाई को 8:00 बजे चतुर्मास स्थल की ओर मंगल विहार होगा इसी क्रम में सभी महिला मंडलों ने माता जी को श्रीफल अर्पित किए माताजी की आहार चर्या सूर्यकांता जी सेठी के निवास पर हुई आज के कार्यक्रम में सम्यक दर्शन कलश पुण्यार्जन करने का सौभाग्य नत्थी लाल प्रदीप कुमार विजय जैन मुकेश कुमार संजय जी जैन पाल बिचला को प्राप्त हुआ पत्रिका का विमोचन माता जी के सानिध्य में किया गया विमोचन सोनीका भैंसा अर्चना गंगवाल सरला लुहाडिया एवं वीनू गंगवाल ने किया
आनंद नगर जैन मंदिर की ओर से निर्मल गंगवाल आर के बोहरा सुबोध पाटनी राजकुमार बज आदि उपस्थित थे

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