श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ संघ अंतर्गत पुष्कर रोड़ स्थित श्री कलापूर्ण सूरि जैन आराधना भवन पुष्कर रोड़ पर मुक्तीश्वर विजय महाराज के शिष्य मुनीश्वर विजय महाराज ने पर्यूषण महापर्व की महत्ता बताते हुए फरमाया कि इस पर्व का मर्म क्षमापना है, जब तक क्षमापना नहीं होती है तब तक यह पर्वअधूरा है, क्षमा मांगना व क्षमा देना आराधक के लक्षण है, क्षमा न मांगना व क्षमा नहीं देना विराधक के लक्षण है, इस पर्व में आराधना का माहौल बन जाता है, समग्र वातावरण धर्ममय बन जाता है।
श्रावक-श्राविका इस पर्व पर तपस्या, उपवास आदि कर अपने निकाचित कर्म का क्षय करते है एवं धर्म आराधना, प्रभु भक्ति, दान-परोपकार कर पुण्य अर्जन करते हैं एवं क्षमा मांगकर मन निर्मल करते हैं।
मंत्री रिखबचंद सचेती ने कहा कल पर्यूषण पर्व के प्रथम दिन श्रावक के पांच कर्तव्य पर विवेचन होगा।
रिखबचंद सचेती
मंत्री