पर्यूषण पर्व प्रथम दिवस

श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ संघ अंतर्गत पुष्कर रोड़ स्थित श्री कलापूर्ण सूरि जैन आराधना भवन में मुक्तीश्वर विजयजी महाराज ने पर्यूषण पर्व में श्रावक के पाँच कर्तव्य का विवेचन करते हुए दो कर्तव्य को समझाते हुए प्रथम कर्तव्य अमारी प्रवर्तन यानि अहिंसा का फैलाव करना, अहिंसा यानि मन-वचन-काया से किसी अन्य जीव को दु:ख नहीं पहुँचाना, किसी प्राणी को दु:खी करके धर्म नहीं हो सकता, जीवों को निर्भय बनानाही अहिंसा है। दूसरा कर्तव्य साधर्मिक भक्ति, साधर्मिक भक्ति से अन्य को सम्यक्तव देना उनका सम्यक्त्व दृढ़ करना, समानता विकसित करना अपना जैसा बनाने की भावना रखना आदि। मंत्री रिखबचंद सचेती ने कहा कि श्रावक-श्राविकाओं में तपस्या एवं विभिन्न धर्म आराधना में उत्साह देखने से वातावरण धर्ममय आनन्दित महसूस हो रहा है।
रिखबचंद सचेती
मंत्री

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