बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की आज से शुरूआत

मशाल जूलूस निकालकर बाल विवाह रोकथाम हेतु लेंगे शपथ
खत्‍म होगी बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई

आज दिनांक 16 अक्टूबर 2022 को कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन्स फाउण्डेशन एवं राजस्थान महिला कल्याण मण्डल, चाचियावास के द्वारा संयुक्त रूप से अजमेर जिले में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरूआत बजरंग गढ़ चौराहे सहित जिले के 51 गॉवों से मशाल जूलूस के साथ की जाएगी।
संस्था निदेशक राकेश कुमार कौशिक ने बताया कि नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी जी के नेतृत्व में सम्पूर्ण भारत वर्ष में 300 से ज्यादा जिलों में प्रारम्भ किए जा रहे बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत अजमेर जिले में बजरंग गढ़ चौराहे पर मुख्य कार्यक्रम के साथ जिले के 51 गॉवों में संस्था कार्यकर्ता व स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, वोलेन्टियर्स गावं की महिलाओं व बेटियों के द्वारा बाल विवाह जागरूकता हेतु मोमबत्ती, दिया, मशाल आदि जलाकर बाल बिवाह रोकथाम की शपथ ली जाएगी।
निदेशक श्री कौशिक ने बाल विवाह पर चिंता जताते हुए कहा, ‘बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है। इसको रोकने के लिए अच्‍छे कानून भी हैं और सरकार अपने स्‍तर पर प्रयास भी कर रही है लेकिन लोग बाल विवाह के दुष्‍परिणामों के प्रति जागरूक नहीं हैं। वे इसे एक परंपरा के तौर पर लेते हैं, जिसके कारण आज भी समाज में बाल विवाह प्रचलन में हैं।’ उन्‍होंने कहा, ‘मशाल जुलूस का उद्देश्‍य यह है कि लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया जाए और उन्‍हें इसके दुष्‍परिणामों के बारे में बताया जाए। सरकार और सिविल सोसायटी के एकजुट प्रयास से ही हम बाल विवाह जैसी बुराई को रोक सकेंगे। श्री कैलाश सत्‍यार्थी जी ने लोगों को जागरूक कर बाल विवाह के प्रति उनकी सोच व व्‍यवहार में बदलाव लाने और बच्‍चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया है। इसी के लिए उन्‍होंने तीन साल तक चलने वाले ‘बाल विवाह मुक्‍त भारत’ अभियान की शुरुआत की है जिसका उद्देश्य बाल विवाह के मामलों में 10 प्रतिशत कमी लाते हुए कानून का सख्‍ती से पालन कराना, बच्‍चों की सहभागिता बढ़ाना और उनका सशक्‍तीकरण करना तथा यौन शोषण से बच्‍चों को सुरक्षा देना है ताकि सामाजिक व्‍यवहार व सोच में बदलाव लाकर बाल विवाह रूपी अपराध को खत्‍म किया जा सके। इस अभियान की शुरुआत आज से सम्पूर्ण भारत में हागी जिसके तहत 300 से ज्‍यादा जिलों में लाखों महिलाएं मशाल जुलूस निकालेंगी, इसमें देशभर के करोड़ों लोग हिस्‍सा लेंगे।
भारत सरकार की साल 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्‍थान में 12,91,700 लोगों का बाल विवाह हुआ है। यह पूरे देश के बाल विवाह का 11 प्रतिशत है। बाल विवाह के मामले में राजस्‍थान, देशभर में दूसरे नंबर पर है। नेशनल फैमिली हेल्‍थ सर्वे-5 के ताजा आंकड़े भी साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों की तस्‍दीक करते हैं। सर्वे के अनुसार देश में 20 से 24 साल की उम्र की 23.3 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिनका बाल विवाह हुआ है। अभियान में पांच हजार गांवों तक पहुंचा जाएगा। इसका लक्ष्‍य साल 2025 तक बाल विवाह की संख्‍या में 10 प्रतिशत की कमी लाना है जो कि अभी 23.3 प्रतिशत है। आंकड़ों से पता चलता है कि बाल विवाह एक गंभीर समस्‍या है और यह देश के सर्वांगीण विकास में बाधक है। इसी को देखते हुए नोबेल विजेता कैलाश सत्‍यार्थी ने ‘बाल विवाह मुक्‍त भारत’ अभियान का ऐलान किया है। तीन साल तक चलने वाले इस अभियान के तहत गांव-गांव जाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्‍परिणामों के बारे में जागरूक किया जाएगा। कार्यक्रम समन्वयक नानूलाल प्रजापति ने बताया कि अजमेर में आयोजित कार्यक्रम में जिला पुलिस, विभिन्न प्रशासनिक विभागों, मानव तस्करी विरोधी ईकाई, जिला बाल संरक्षण ईकाई जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन तथा स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

(राकेश कुमार कौशिक)

निदेशक

मो. 9829140992

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