अजमेर। राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में सड़क सुरक्षा के प्रति जन जागरूकता का कार्यक्रम आयोजित आयोजित किया। जिसमें सड़क सुरक्षा प्रतियोगिताओं (स्लोगन, प्रष्नोत्तरी, निबन्ध लेखन, पोस्टर, कहानी लेखन,वाद-विवाद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भाग लिया। जिसमें 6 प्रतियोगिताओं में प्रथम द्वितीय व तृतीय रहें विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण किये गये। जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साह से भाग लिया।
सह आचार्य अलका देष ने विद्यार्थियों को बताया कि राज्य में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही है, ऐसे में आमजन को सुरक्षित आवागमन हेतु सड़क सुरक्षा उपायों की जानकारी देना अति आवष्यक है। स्वयं के वाहन से यात्रा करने वालों को यातायात के नियमों की पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के बाद ही वाहन चलाना चाहिए एवं इन नियमों की पालना करनी चाहिए।
प्राध्यापक लोकेष शर्मा ने विद्यार्थियों को बताया की सड़क का उपयोग करने वाले यात्री, साईकिल चालक, रिक्षा, ऊँट/बैलगाड़ी एवं 2-3-4-6 व्हीलर वाहन आदि सभी ट्रैफिक की परिभाषा में आते है। सड़क का प्रयोग करने से पूर्व सड़क की भाषा जिसे सिग्नल कहते है कि जानकारी प्राप्त करना आवष्यक है। उसके बाद सड़क पर क्या करना है, क्या नहीं करना है, क्या सावधानी रखनी है एवं यदि कोई जानकारी चाहे तो कहां मिलेगी आदि के लिए सड़क पर लगे चिन्हों को समझना आवष्यक है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद करने हेतु विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि किसी सड़क दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्षी सहित कोई भी गुड सेमेरिटन (अच्छा मददगार) किसी घायल व्यक्ति को निकटतम अस्पताल में लेकर जा सकता हे, उस गुड सेमेरिटन को तुरंत जान की अनुमति दे दी जाएगी एवं अच्छे मददगार से किसी भी प्रकार कोई पुछताछ नही की जाएगी।
इसी क्रम में प्राचार्य डॉ अवधेष कुमार मिश्र ने विद्यार्थी के समक्ष सड़क सुरक्षा क्यों आवष्यक है कुछ तथ्य प्रस्तुत किये जिसके तहत सड़क सुरक्षा हमारे देष में प्रमुख सामाजिक चिंता के रूप में उभर रहा हैं। हम जागरूक होना इस लिए आवष्यक है क्योंकि एक सड़क दुर्घटना की कीमत चालक के परिवार के अलावा देष को भी चुकानी पड़ती है। प्रतिवर्ष लगभग 3 प्रतिषत से 4 प्रतिषत तक भारतीय संपदा का नुकसान सड़क दुर्घटनाओं में होता आ रहा हैं।
कार्यक्रम में व्याख्याता राजेन्द्र सिंह लखावत, हेमन्त सिंह यादव, दीपेष यादव, जितेन्द्र सिंह नरूका, ऋषि मिर्धा, शारदा देवी उपस्थित रहें।