विवेकानन्द के आदर्शों से ही होगा युवा संस्कारवान – डाॅ. स्वतन्त्र शर्मा

ठाकुर रामकृष्ण परमहंस ने काॅलेज के युवा नरेन्द्र की छिपी हुई प्रतिभा को पहचान कर उसके जीवन को ऐसा आध्यात्मिक मोड़ दिया जिसने स्वामी विवेकानन्द के रूप में संपूर्ण विश्व में भारत की संस्कृति का डंका बजा दिया। समाज में इन्हीं छिपी हुई आध्यात्मिक शक्तियों को खोजकर उनके परिष्करण का कार्य आज विवेकानन्द केन्द्र कर रहा है। विवेकानन्द के आदर्शों से युवा न केवल संस्कारवान बनेगा अपितु भारत को विश्वगुरू बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए भी सक्षम बन सकेगा। उक्त विचार विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी राजस्थान प्रान्त के कार्यपद्धति प्रमुख डाॅ. स्वतन्त्र शर्मा ने अजमेर के विवेकानन्द विस्तार द्वारा नाका मदार के मधुबन काॅलोनी पार्क में आयोजित किए जा रहे व्यक्तित्व विकास शिविर के चतुर्थ दिन के अवसर पर व्यक्त किए। शिविर का संचालन प्रतिदिन शाम 6 से 7 बजे तक हो रहा है |
शिविर संयोजक रविन्द्र जैन ने बताया कि इस शिविर में बच्चों में विभिन्न योगाभ्यास एवं खेलों के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक स्फूर्ति का जागरण किया जा रहा है वहीं गीत , कहानी आदि के माध्यम से संस्कारवान बनने को प्रेरित किया जा रहा है। नगर प्रमुख भारत भार्गव ने बताया कि विवेकानन्द केन्द्र प्रत्येक वर्ष ग्रीष्मावकाश के दौरान इस प्रकार के संस्कार शिविरों का आयोजन जन सहयोग से कर रहा है क्योंकि आज की युवा पीढ़ी ही कल देश का भविष्य बनने वाली है। शिविर में अंकुर प्रजापति, सचिन सोनी, मंजू गुप्ता, पुष्पा वजीरानी इत्यादि सहयोग कर रहे हैं।

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