नित्य पूजा करो, नित्य दर्शन करो पर एक पृष्ठ जिनवाणी का जरूर पड़ा करो-108 उपाध्याय वृषभानंद जी मुनिराज
आज दिनांक 11 जून 2024 – परम पूज्य आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य श्री 108 उपाध्याय वृषभानन्द जी मुनिराज ससंघ श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर नाकामदार अजमेर में विराजमान है।
यह जानकारी देते हुए मंत्री विनित कुमार जैन ने बताया कि आज की धर्मसभा में मंगलाचरण लोकमन जैन साहबजाज परिवार के द्वारा व आचार्य विद्यानन्नद जी एवं वसुनन्दी जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं चित्र अनावरण चुन्नीलाल जैन साहबजाज के द्वारा किया गया।
इसी क्रम में श्रुत पंचमी महापर्व के पावन अवसर पर संगीतमय मॉं जिनवाणी की महाअराधना का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें प्रातः 6ः30 बजे जिनाभिषेक व शांतिधारा, प्रातः 7ः30 बजे संगीतमय श्रुत स्ंकध महामंडल विधान पूजन तथा प्रातः 9ः30 बजे आदि सृष्टि, सुनन्दा महिला मण्डल, स्वतन्त्र जैन चिन्तन व ब्राहमी महिला मंडल की महिलाओं द्वारा जिनवाणी संवर्धन हेतु शास्त्र भेंट किया गया। जैन धर्म मे श्रुत पंचमी का पर्व हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता है इस दिन जैन धर्म के मुख्य ग्रंथ षट्खंडागम की लेखनी आचार्य श्री पुष्पदंत व भूतबली के द्वारा पूर्ण हुई थी। श्री श्रुत स्कंध विधान को लेकर समाज की मातृ शक्ति व युवा साथियों मे उत्साह व उमंग था सभी ने विधान मे सम्मिलित होकर आनंद व प्रभु भक्ति की। कार्यक्रम में पंडित राहुल पंचगईया, विनित जैन, विजय संगीतकार, नीरज सुथनिया, भागचन्द जैन आदि द्वारा विधान पूजन कराया गया।
इस अवसर पर श्री 108 उपाध्यक्ष वृषभानन्द जी मुनिराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए पर्व दो प्रकार के होते हैं लौकिक ओर आलौकिक। लौकिक पर्व में राष्ट्रीय पर्व आदि आते हैं जिनसे हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान होती है। तीर्थंकर आदि के निर्वाण पर्व श्रुत पर्व अस्तानहिक पर्व सोलहकारण पर्व दसलक्षणी पर्व यह लोकोत्तर पर्व की श्रेणी में आते हैं। पूजा नित्य करो, दर्शन नित्य करो पर एक पृष्ठ जिनवाणी का जरूर पड़ा करो। यह हमारे षट आवश्यकों में शामिल है। इसके बिना हमारा कल्याण सम्भव नहीं। इतने शास्त्र हमारे मन्दिर में विराजित हैं। यह केवल देखने या दर्शन करने के लिए नहीं अपितु उनको देखे खोले ओर उनका वाचन कर के अपने जीवन में मन की ग्रंथियों को भी खोलें। मुनिराज ने कहा कि आज हमारे बीच में जिन आचार्यों ने महान उपकार करके हम तक यह जिनागम पहुंचाया ऐसे पुष्पदन्त भूतबलि आचार्य हमारे बीच में नहीं हैं पर उनकी प्रति कृति के रूप में गुरु देव भूतबलि सागर महाराज उपस्थिति हैं ये भी दक्षिण से आए हैं वे भी दक्षिण से निकले थे।
इसी क्रम में कल दिनांक 12 जून बुधवार को प्रातः 6ः30 बजे अभिषेक शांतिधारा व शांतिविधान, प्रातः 8ः30 बजे श्री 108 उपाध्यक्ष वृषभानन्द जी मुनिराज के प्रवचन, प्रातः 9ः30 बजे आहरचर्या, दोपहर 3ः00 से 4ः30 बजे स्वाध्याय, सांय 5ः00 से 5ः30 बजे तक प्रतिकम्रण, सांय 6ः30 बजे आनन्द यात्रा व 7ः30 बजे आरती का कार्यक्रम श्री जिनषासन तीर्थ क्षेत्र जैन नगर नाका मदार अजमेर पर आयाजित किया जायेगा।
भवदीय
(विनित कुमार जैन)
मंत्री
मो. 9414281335