अजमेर। वक़्फ़ संशोधन विधेयक के विरोध में कांग्रेस से जुड़े मुस्लिम नेताओं एवं मुस्लिम सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधिमंडल ने जेपीजी के सदस्य एवं सांसद इमरान मसूद से मुलाकात कर संशोधन के विरोध में तथ्यात्मक चर्चा की और समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
रविवार को वक़्फ़ संशोधन बिल के लिए गठित जेपीसी के सदस्य एवं सांसद इमरान मसूद के एक दिवसीय अजमेर प्रवास के दौरान कांग्रेस से जुड़े मुस्लिम नेताओं और मुस्लिम सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर वक्फ एक्ट संशोधन विधेयक ज्ञापन में बताया कि मुसलमान संशोधन का विरोध करते हैं, क्योंकि वक्फ मुसलमानों का धार्मिक मामला है और उसमें गलत नीयत के साथ जो संशोधन किए जा रहे हैं, उसका मुसलमान विरोध करते हैं. वे सरकार को इस बात की इजाजत नहीं देंगे कि वे उनके धार्मिक मामलों में दखलअंदाजी करें संविधान मुसलमानों को इस बात की इजाजत देता है कि वे अपने धर्म के अनुसार आचरण करें सच्चाई यह है कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है, इसलिए हम इसका विरोध करते हैं
सरकार जो संशोधन लेकर आ रही है हम उसका विरोध करते हैं. वक्फ पूरी तरह से धार्मिक काम है. इसमें किसी का हस्तक्षेप सही नहीं होगा।
ज्ञापन में बताया गया कि वक्फ एक्ट में संशोधन की कोई जरूरत नहीं है, 2013 में इसमें काफी संशोधन हुए थे और वे काफी है हालांकि उसमें भी मुसलमानों की पूरी बात शामिल नहीं हो पाई थी. वक्फ पूरी तरह से मुसलमानों का निजी मसला है और इसमें सरकार को दखल नहीं देना चाहिए. जहां तक बात वक्फ बोर्ड में गैर मुसलमान को शामिल करने की है, तो इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है, लेकिन अगर इस तरह की कोई कोशिश हो रही है, तो मैं यह कहूंगा कि वक्फ हमारे बाप-दादाओं की संपत्ति है और जब हम उसका इस्तेमाल करने जाते हैं, तो कोई बाहर का आकर हमसे यह कहे कि हम उसकी देखभाल करेंगे. यह मुसलमानों के साथ जुल्म है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे.
संयुक्त संसदीय दल के अध्यक्ष जगदंबिका पाल को संबोधित पत्र में बताया गया कि प्रस्तावित बिल आने से 70 फीसदी वक्फ संपत्ति डेंजर जोन में चली जायेगी। मौलाना ने कहा कि वक्त संपत्ति के बारे में लोगों को गुमराह किया जा रहा है। बल्कि ये संपत्ति वो है जिसे हमारे बुजुर्गों ने अल्लाह के नाम पर दान दिया है। मस्जिस, दरगाह और मदरसा में इसका इस्तेमाल है। कोई भी संपत्ति दूसरे धर्म की नहीं है। जिसके चलते हम इस बिल का शुरू से विरोध कर रहे हैं।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि वक्फ धार्मिक है और इसका इस्तेमाल केवल धर्म के लिए किया जाता है। वक्फ केवल अच्छे कामों के लिए होता है। वक्फ करने वाला व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ करता है। वक्फ की जमीन को बेचा नहीं जा सकता है। वक्फ बोर्ड अपने हिसाब से मुतवल्ली बना सकता है। लेकिन इसके लिए मुस्लिम होना जरूरी है। वक्फ प्रॉपर्टी को किसी दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है। वक्फ मुसलमान के वहां होता है और इसमें संसोधन से मुसलमान को नुकसान पहुंचेगा। वक्फ संपत्ति को किराए पर दिया जा सकता है लेकिन संपत्ति बर्बाद ना हो। जिसके चलते वक्फ में संसोधन से वक्फ वक्फ नहीं रहेगा, यह लोगों की निजी जायदाद हो जाएगी।
प्रतिनिधि मंडल में सैयद गुलाम मुस्तफा चिश्ती मुजफ्फर भारती सैयद रब नवाज जाफरी सैयद मंजूर अली अशरफ बुलंद खान अजमत खान वाहिद मोहम्मद फरीद हुसैन डॉ नवाज उल हक सैयद मंसूर अली मुफ़ीस अहमद हसन खान अकील अहमद सहित मुस्लिम नेतागण एवं समाज प्रतिनिधि शामिल थे।