अजमेर, 1 मई। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव सह-अस्तित्व (एक्सिस्टेंस) की संस्कृति रही है, जिसमें मनुष्य के साथ-साथ प्रत्येक जीव—चाहे वह पशु हो या पक्षी—को समान महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्रकृति का “कस्टोडियन” मानते हुए उसके संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है। वे विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे, जिसमें गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए पानी के पात्र (परिंडे) रखने का अभियान चलाया गया।
कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे वैदिक एवं उत्तरवर्ती साहित्य में भी यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह प्रकृति एवं जीव-जंतुओं की रक्षा में अपना योगदान दे। उन्होंने कहा कि हमारे परिवारों में भी प्रतिदिन पुण्य कार्य करने की परंपरा रही है, जिसमें जीवों की सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने सभी उपस्थितजनों से आह्वान किया कि वे संकल्प लें कि प्रकृति के संरक्षक होने के नाते पक्षियों एवं अन्य जीवों की रक्षा एवं संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। उन्होंने विशेष रूप से उद्यान अधीक्षक श्री राजेन्द्र तिवारी का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस सार्थक आयोजन की पहल की। कुलगुरु ने अपने संबोधन में विश्व श्रम दिवस के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि पशु, पक्षी और मनुष्य के श्रम की तुलना की जाए तो पक्षी सबसे अधिक श्रम करने वाला प्राणी है, जो अपने जीवन का लगभग 85 प्रतिशत समय श्रम में व्यतीत करता है और अत्यंत कम विश्राम में भी संतुष्ट रहता है। उन्होंने कहा कि पक्षियों से हमें निरंतर परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य प्राप्ति के लिए सतत प्रयास करने की प्रेरणा लेनी चाहिए। इसी भावना के साथ विश्वविद्यालय द्वारा इस वर्ष श्रम दिवस को पक्षियों के संरक्षण एवं सेवा के प्रति समर्पित करने का निर्णय लिया गया, जो अपने आप में एक अभिनव पहल है।
कार्यक्रम में प्रो. प्रवीण माथुर, प्रो. ऋतु माथुर, कुलसचिव श्री कैलाश चन्द्र शर्मा, प्रो. अरविंद पारीक, प्रो. सुभाष चन्द्र, प्रो. शिव प्रसाद, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुनील टेलर, डॉ. आशीष पारीक, डॉ. तपेश्वर कुमार सहित अनेक शिक्षाविद एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन उद्यान अधीक्षक श्री राजेन्द्र तिवारी द्वारा किया गया। अंत में कुलसचिव कैलाश चन्द्र शर्मा ने सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि समाज को मानवीय मूल्यों और सह-अस्तित्व की भावना से भी जोड़ते हैं।