अजमेर, भारत विकास परिषद मुख्य शाखा अजमेर, सेंट्रल एकेडमी स्कूल अजमेर व ऑप्टिमिस्टिक आउटरीच ट्रस्ट द्वारा सेंट्रल एकेडमी स्कूल में विद्यार्थियों के लिए “भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं का वैज्ञानिक आधार” विषय पर एक प्रेरणादायी कार्यशाला का आयोजन किया गया। शिविर प्रभारी अनुपम गोयल ने बताया कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता व स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। कार्यशाला में लगभग 75 से अधिक विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों ने भाग लिया । कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं के पीछे निहित वैज्ञानिक तथ्यों से परिचित कराना तथा उनमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान एवं जिज्ञासा का भाव विकसित करना था।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिलीप पारीक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की अनेक परंपराएँ केवल आस्था या रीति-रिवाज नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे गहन वैज्ञानिक सोच और जीवनोपयोगी ज्ञान छिपा हुआ है। उन्होंने चरण स्पर्श, तिलक धारण, सूर्य नमस्कार, नमस्ते, तुलसी पूजन, व्रत-उपवास, मंदिर में घंटी बजाना, चप्पल बाहर उतारना, दीप प्रज्वलन, प्राणायाम आदि अनेक परंपराओं का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करते हुए बताया कि हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता को ध्यान में रखकर इन परंपराओं का निर्माण किया था।
उन्होंने कहा कि आज विश्व जिन विषयों को “माइंडफुलनेस”, “डिटॉक्स”, “ब्रीदिंग थेरेपी”, “साउंड थेरेपी” और “होलिस्टिक हेल्थ” के नाम से स्वीकार कर रहा है, वे भारतीय जीवन पद्धति का अभिन्न अंग रहे हैं। विद्यार्थियों ने बड़ी रुचि एवं उत्साह के साथ कार्यशाला में भाग लिया तथा विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में भारत विकास परिषद के शाखा संरक्षक सुरेश चंद गोयल, अध्यक्ष रमेश चंद्र जादू, सचिव लक्ष्मी नारायण बंसल, महिला सहभागिता संयोजक मधुरिमा गोयल, शिविर प्रभारी अनुपम गोयल सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
अंत में परिषद पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का आह्वान किया। स्कूल प्रशासन ने इस ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी कार्यशाला के लिए भारत विकास परिषद का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिलीप पारीक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की अनेक परंपराएँ केवल आस्था या रीति-रिवाज नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे गहन वैज्ञानिक सोच और जीवनोपयोगी ज्ञान छिपा हुआ है। उन्होंने चरण स्पर्श, तिलक धारण, सूर्य नमस्कार, नमस्ते, तुलसी पूजन, व्रत-उपवास, मंदिर में घंटी बजाना, चप्पल बाहर उतारना, दीप प्रज्वलन, प्राणायाम आदि अनेक परंपराओं का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करते हुए बताया कि हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता को ध्यान में रखकर इन परंपराओं का निर्माण किया था।
उन्होंने कहा कि आज विश्व जिन विषयों को “माइंडफुलनेस”, “डिटॉक्स”, “ब्रीदिंग थेरेपी”, “साउंड थेरेपी” और “होलिस्टिक हेल्थ” के नाम से स्वीकार कर रहा है, वे भारतीय जीवन पद्धति का अभिन्न अंग रहे हैं। विद्यार्थियों ने बड़ी रुचि एवं उत्साह के साथ कार्यशाला में भाग लिया तथा विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में भारत विकास परिषद के शाखा संरक्षक सुरेश चंद गोयल, अध्यक्ष रमेश चंद्र जादू, सचिव लक्ष्मी नारायण बंसल, महिला सहभागिता संयोजक मधुरिमा गोयल, शिविर प्रभारी अनुपम गोयल सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
अंत में परिषद पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का आह्वान किया। स्कूल प्रशासन ने इस ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी कार्यशाला के लिए भारत विकास परिषद का आभार व्यक्त किया।
अनुपम गोयल
शिविर प्रभारी
भारत विकास परिषद मुख्य शाखा अजमेर
9214429399