*जेएलएन अस्पताल में घटिया निर्माण और चूना मिलाने की खबर पूर्णतः आधारहीन तथा मिथ्या*

*सार्वजनिक निर्माण विभाग ने किया समाचार का खंडन*
*अनुबंध के अनुसार निर्धारित ब्रांडेड डिस्टेंपर से ही किया जा रहा है पेंट*
*विभाग ने जारी किए प्रगति और वित्तीय व्यय के प्रामाणिक आंकड़े*

अजमेर, 4 जून। जेएलएन चिकित्सालय के मरम्मत कार्यों को लेकर प्रकाशित समाचार का सार्वजनिक निर्माण विभाग (नगर खण्ड), अजमेर द्वारा खंडन किया गया है। अधिशाषी अभियन्ता श्री अशोक तंवर ने स्पष्ट किया है कि अखबार में प्रकाशित लीपापोती और डिस्टेंपर के स्थान पर स्टेनर-चूना लगाने संबंधी खबर पूरी तरह से तकनीकी तथ्यों से परे, भ्रामक और आधारहीन है।

श्री तंवर ने बताया कि जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय द्वारा आरएमआरएस  के तहत सिविल कार्यों के लिए कुल 349.87 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है। इस स्वीकृति के एवज में विभाग को अब तक तीन किश्तों में 9 जुलाई 2025 को 87.47 लाख रुपये, 12 जनवरी 2026 को 87.46 लाख रुपये तथा 16 मार्च 2026 को 87.47 लाख रुपये डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से कुल 262.40 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है। प्राप्त राशि के विरुद्ध अब तक 117.14 लाख रुपये का कार्य नियमानुसार करवाया जा रहा है। इस संबंध में उपयोगिता प्रमाण पत्र  दिनांक 19 मई को ही प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक, जेएलएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर को प्रेषित किया जा चुका है।

पेंट की गुणवत्ता को लेकर फैलाई गई भ्रांतियों को तकनीकी रूप से स्पष्ट करते हुए अधिशाषी अभियन्ता श्री तंवर ने बताया कि निविदा अनुबंध के अनुसार परिसर में डिस्टेंपर द्वारा ही पेंट का कार्य स्वीकृत है और मौके पर प्रतिष्ठित एशियन पेंट्स ब्रांड का ही डिस्टेंपर उपयोग में लिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिस्टेंपर का मूल बेस कलर सफेद होता है। अस्पताल की आवश्यकता के अनुरूप वांछित शेड (रंग) तैयार करने के लिए उसमें नियमानुसार एशियन पेंट्स ब्रांड का ही स्टेनर (कलर टोनर) मिलाया गया है।

उन्होंने बताया कि समाचार में चूना मिलाने का किया गया दावा पूरी तरह झूठ है, क्योंकि डिस्टेंपर में चूना मिलाकर काम किया जाना तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है। कार्य की गुणवत्ता निर्माता कंपनी के मापदंडों (स्पेसिफिकेशन्स) के अनुसार ही सुनिश्चित की जा रही है। इसके तहत 1 किलोग्राम डिस्टेंपर सामग्री में केवल 600 से 700 एमएल पानी मिलाकर वर्केबल कंसिस्टेंसी तैयार की जाती है।

उन्होंनेे पूर्व में हुए कार्यों की मज़बूती का हवाला देते हुए बताया कि जून 2025 में एनेस्थीसिया न्यू ओटी की गैलरी तथा जुलाई 2025 में ट्रॉमा वार्ड की गैलरी में जो पेंट किया गया था। वह आज एक वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित और सही स्थिति में है। इसके साक्ष्य के रूप में तस्वीरें भी उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त गुरूवार को सहायक अभियन्ता द्वारा मौके पर डिस्टेंपर का मैटेरियल तैयार करने का संपूर्ण वीडियो फुटेज भी बनाया गया है। यह कार्य की पूर्ण पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। विभाग ने आमजन से ऐसी भ्रामक और असत्य खबरों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

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