*भारतीय संस्कृति की उत्सव परंपरा ही विकास का आधार : कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल*

*महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के 39वें स्थापना दिवस समारोह में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन, विश्वविद्यालय परिवार ने लिया विकास का संकल्प*

अजमेर, 5 अगस्त।
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के 39वें स्थापना दिवस समारोह की श्रृंखला में बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति एवं लोक परंपराओं पर आधारित आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थितजनों का मन मोह लिया।

डीन छात्र कल्याण प्रो. सुभाष चन्द्र ने बताया कि स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए विश्वविद्यालय में रचनात्मक एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ करना है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति मूलतः उत्सव की संस्कृति है, जहाँ प्रत्येक शुभ कार्य का आरंभ उत्सव, उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा के साथ किया जाता है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समाज और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

कुलगुरु ने कहा कि विश्व इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन देशों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को भुला दिया, उनका विकास संतुलित और स्थायी नहीं रह सका। भारत ने भी समय के अनुभवों से सीखते हुए “विरासत भी, विकास भी” की अवधारणा को अपनाया है, जो आज राष्ट्र निर्माण का सशक्त मंत्र बन चुकी है।

उन्होंने विश्वविद्यालय की 39 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक संस्थान के इतिहास में चुनौतियों के दौर आते हैं, किन्तु उसकी वास्तविक पहचान उसकी उपलब्धियों, मूल्यों और सतत प्रगति से होती है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है और इसी विरासत से प्रेरणा लेकर विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना हम सभी का दायित्व है।

कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे स्थापना दिवस को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि आत्ममंथन, नवसंकल्प और विकास के संकल्प दिवस के रूप में मनाएँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि पूरा विश्वविद्यालय परिवार समर्पण, सकारात्मक सोच और टीम भावना के साथ कार्य करेगा तो आगामी वर्ष में विश्वविद्यालय की उपलब्धियाँ कई गुना बढ़ेंगी और संस्थान शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ तथा संबद्ध महाविद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया तथा स्थापना दिवस समारोह को नई ऊर्जा और उल्लास से भर दिया।

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