ब्यावर, 6 अगस्त। श्री साधुमार्गीय शान्तक्रान्ति जैन श्रावक संघ की ओर से गुरुवार को नवकार भवन में आयोजित धर्मसभा में जिनशासन गौरव आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराज जी म.सा. ने सद्भाव का संदेश दिया। आचार्यश्री ने प्रवचन देते हुए कहा कि प्रकृति पात्रता देखती है। मनुष्य का मनचाहा नहीं होता। अगर मनचाहा होता है तो अहंकार आ जाता है। आचार्यश्री ने सद्भाव में रहना है, हर कष्ट सहना है.. गीत के माध्यम से जीवन शैली को बेहतर बनाने का संदेश दिया। उन्होंने समझाया कि सद्भाव की कहीं कोई दवाई नहीं है। सद्भाव सिर्फ गुरु की शरण में जाकर ही मिलता है। गुरु सभी पर नजर रखते हैं। किसी का कभी अहित नहीं होने देते। हर व्यक्ति को सन्मार्ग दिखाते हैं।
सत्संग के बीच गुरुवर ने संदेश दिया कि बीते हुए कल से सबक लेना चाहिए। अगर ऐसा करेंगे तो आने वाला कल सुधर जाएगा। कल की गलतियों को सुधारकर आज और आने वाले कल को बेहतर बना सकेंगे। बीते हुए वक्त का विलाप न करें। आने वाला समय सार्थक करने के लिए सत्संग करें। जीवन को आनंदमय और तनाव मुक्त बनाए रखने के लिए संतों की वाणी और प्रवचन सुनें, भक्ति करें। जीवन सुधर जाएगा। प्रवचन के प्रति अश्रद्धा, अनास्था रखना और अनभिज्ञ रहना पाप के समान है। प्रवचन श्रेष्ठ है। प्रवचन मांगलिक है। प्रवचन भाग्य है, सौभाग्य है। प्रवचन की उपेक्षा और अवहेलना न करें। पाप का त्याग करें। जिन वाणी, गुरु वाणी के प्रति श्रद्धा रखें। प्रवचन के प्रति भक्ति, आस्था, समर्पण रखें।
आचार्यश्री ने कहा कि भक्ति का मार्ग दुर्लभ है। ज्ञान प्राप्त करने में कोई शुल्क नहीं लगता। मैनेजमेंट गुरु को सुनने के लिए हजारों-लाखों रुपए खर्च होते हैं लेकिन संत फ्री में प्रवचन देते हैं। ऐसे संतों का सानिध्य करें। संतों की वाणी सुनें। संतश्री ने 8 वर्ष की राजकुमारी का प्रसंग सुनाते हुए समझाया कि माता-पिता की गोद में बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है। उसी तरह संत की शरण में साधक भी सुरक्षित रहता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान दो जगह प्राप्त होता है, संतों के प्रवचन से और साहित्य पढ़ने से। अच्छा साहित्य पढ़ेंगे तो विचार अच्छे और श्रेष्ठ होंगे। प्रतिदिन समय निकालकर कुछ देर ज्ञानवर्धक पुस्तकें अवश्य पढ़ें। जितना मन पैसा कमाने में लगाते हैं उतना ही मन साहित्य पढ़ने में भी लगाना चाहिए। बड़ा पद हासिल करना और खूब पैसा कमा लेना सफलता नहीं है। सफल व्यक्ति वही है जिसके जीवन में धर्म है।
संघ अध्यक्ष संपतराज डेढ़िया ने बताया कि आगामी 9 अगस्त, रविवार को नवकार भवन में लाइफ मैनेजमेंट शिविर का आयोजन होगा। दोपहर 1.45 बजे से 3.15 बजे तक आयोजित शिविर में पूज्य संत रिश्तों की मधुरता पर आधारित विषयों पर संदेश देंगे।