भाजपा राज में ‘राइट टू एजुकेशन’ बना केवल कागजी जुमला

निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस की अंधी लूट से आम जनता का भविष्य बर्बाद — डॉ. राजकुमार जयपाल
एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च 1.25 से 1.50 करोड़ तक पहुंचा, सरकार निजी मेडिकल कॉलेजों पर लगाए अंकुश
अजमेर। अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. राजकुमार जयपाल ने निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई के नाम पर वसूली जा रही भारी-भरकम फीस को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में संविधान प्रदत्त शिक्षा के अधिकार की भावना कमजोर होती जा रही है और उच्च शिक्षा, विशेषकर मेडिकल शिक्षा, आम और मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुंच से लगातार दूर की जा रही है।
डॉ. जयपाल ने राजस्थान NEET UG एडमिशन 2026 के तहत निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना का हवाला देते हुए कहा कि कई कॉलेजों में एमबीबीएस की सालाना फीस लाखों रुपये में है। उदाहरण के तौर पर NIMS मेडिकल कॉलेज जयपुर में सामान्य सीट की फीस करीब ₹24.95 लाख प्रतिवर्ष तथा हॉस्टल फीस ₹7 लाख प्रतिवर्ष बताई गई है। डॉ. बी.एस. तोमर इंस्टीट्यूट, जयपुर में मैनेजमेंट सीट की फीस ₹32.50 लाख प्रतिवर्ष और हॉस्टल फीस ₹3.50 लाख है। गीतांजलि मेडिकल कॉलेज उदयपुर में मैनेजमेंट सीट की फीस ₹30 लाख तथा महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज जयपुर में सामान्य सीट की फीस ₹24 लाख प्रतिवर्ष बताई गई है।
इसी प्रकार JNU मेडिकल कॉलेज जयपुर में सामान्य सीट ₹24 लाख और मैनेजमेंट सीट ₹28 लाख प्रतिवर्ष, PIMS उदयपुर में सामान्य सीट ₹22 लाख के साथ अन्य वार्षिक शुल्क तथा व्यास मेडिकल कॉलेज जोधपुर में मैनेजमेंट सीट की फीस ₹30 लाख प्रतिवर्ष बताई गई है।
डॉ. जयपाल ने कहा कि फीस के अतिरिक्त हॉस्टल, कॉशन मनी, अन्य शुल्क, बैंक गारंटी तथा अग्रिम भुगतान जैसी शर्तों का बोझ भी अभिभावकों पर पड़ता है। ऐसे में पांच वर्ष की एमबीबीएस शिक्षा का कुल खर्च कई परिवारों के लिए 1.25 करोड़ से 1.50 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
उन्होंने सवाल किया कि राजस्थान का किसान, मजदूर, छोटा व्यापारी या मध्यमवर्गीय कर्मचारी अपने बच्चे को डॉक्टर बनाने के लिए इतना पैसा कहां से लाएगा? क्या डॉक्टर बनने का सपना केवल उन परिवारों के बच्चों तक सीमित रह जाएगा, जिनके पास करोड़ों रुपये हैं?
डॉ. जयपाल ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस और अन्य शुल्कों पर प्रभावी नियंत्रण भी होना चाहिए। सरकार को पारदर्शी फीस संरचना लागू करने, अभिभावकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ रोकने और मेडिकल शिक्षा को आम विद्यार्थियों की पहुंच में बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में आम जनता की परेशानियों को दूर करने के बजाय बड़े-बड़े दावों तक सीमित है। उन्होंने कहा कि धर्म और भावनात्मक मुद्दों की राजनीति से युवाओं की शिक्षा, रोजगार और भविष्य की वास्तविक समस्याएं छिपाई नहीं जा सकतीं।
डॉ. जयपाल ने कहा कि यदि सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया तो कांग्रेस पार्टी अभिभावकों और विद्यार्थियों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज बुलंद करेगी। शिक्षा किसी वर्ग विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि हर बच्चे का अधिकार और समाज के विकास की बुनियाद है।
कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश गुप्ता ने कहा कि सरकार को इस और ध्यान देकर शिक्षा क्षेत्र में जो लुट मचा रखी हे उससे अविलंब छात्रों को एवं उनके परिवार जनों को फीस में राहत प्रदान करनी चाहिए जिससे आने वाले समय में GEN G आंदोलन न करें और उनको शिक्षा के अच्छे अवसर मिल सके सरकारों को इन शिक्षा माफियाओं पर नकेल कसनी चाहिए।
शैलेश गुप्ता
प्रवक्ता
अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी
6375920300

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