ब्यावर। श्री वर्द्धमान शिक्षण समिति द्वारा संचालित श्री नृसिंह अग्रसेन जैन विद्यापीठ में भारत विकास परिषद की नेता सुभाषचंद्र बोस शाखा, ब्यावर के तत्वावधान में ‘गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। तत्पश्चात राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन कर कार्यक्रम को विधिवत प्रारंभ किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त शिक्षकों का सम्मान किया गया तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों के शैक्षणिक, खेल एवं अन्य कार्यक्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज शर्मा, प्रिंस नवल, योगेश मेवाड़ा, वैभव गौड़ एवं भोमिक को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर भारत विकास परिषद, नेता सुभाषचंद्र बोस शाखा, ब्यावर के अध्यक्ष टी.सी. गोयल, संयुक्त सचिव सुनील हरकुट, संस्कार संयोजक जे.पी. अजमेरा सहित भरतेश जैन, हेमंत काबरा, इंद्रचंद राकावत एवं अनिल अग्रवाल उपस्थित रहे।
विद्यालय की प्राचार्या डॉ. निवेदिता पाठक ने अपने उद्बोधन में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन को सही दिशा देने तथा उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान वास्तव में ज्ञान, संस्कार और शिक्षा के प्रति सम्मान है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ जीवन में अनुशासन, संस्कार एवं श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
श्री वर्द्धमान शिक्षण समिति के मंत्री डॉ. नरेंद्र पारख ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि गुरु विद्यार्थियों के जीवन में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन का सम्मान करते हुए निरंतर परिश्रम, अनुशासन एवं सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान अन्य विद्यार्थियों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है। शिक्षा के साथ संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास ही एक विद्यार्थी को आदर्श नागरिक बनाता है।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में गुरुजनों के प्रति सम्मान, संस्कार, अनुशासन एवं उत्कृष्टता की भावना विकसित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का वातावरण गरिमामय एवं प्रेरणादायी रहा।